25 साल पुराना इंतजार खत्म,नगर निगम कर्मचारियों को मिलेगा नियमितीकरण का तोहफा, बढ़ जाएगा वेतन, सूची तैयार

भोपाल नगर निगम प्रशासन ने सालों से नियमितीकरण की राह देख रहे मस्टरकर्मियों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। साल 1996 से 1999 के बीच भर्ती हुए कर्मचारियों को नियमित करने के लिए निगम ने कर्मचारियों की सूची तैयार कर ली है।

25 साल पुराना इंतजार खत्म,नगर निगम कर्मचारियों को मिलेगा नियमितीकरण का तोहफा, बढ़ जाएगा वेतन, सूची तैयार

1996-99 में भर्ती कर्मचारियों के नियमितीकरण की तैयारी, निगम ने बनाई सूची

हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद सालों से लंबित फाइलें अब आगे बढ़ी हैं

कोलार नगर पालिका से आए 127 कर्मचारियों को भी मिलेगा स्थाईकरण का लाभ

भोपाल। नगर निगम प्रशासन ने वर्षों से नियमितीकरण की राह देख रहे मस्टरकर्मियों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। 1996 से 1999 के बीच भर्ती हुए कर्मचारियों को नियमित करने के लिए निगम ने उनकी सूची तैयार कर ली है। बताया जा रहा है कि ये वही कर्मचारी हैं, जो पहले हाईकोर्ट से आदेश लेकर आए थे, लेकिन लंबे समय तक उनकी फाइलें ठंडे बस्ते में पड़ी रहीं।

अब बदले प्रशासनिक रवैये के चलते इन फाइलों को दोबारा खोला गया है और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इससे कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है।

2014 में समाहित कर्मचारियों को भी मिलेगा लाभ

निगम सूत्रों के अनुसार, 2014 में कोलार नगर पालिका से नगर निगम में समाहित हुए 127 कर्मचारियों को भी स्थायीकरण का लाभ देने की तैयारी की जा रही है। इन्हें भी उसी सूची में शामिल किया जा रहा है, जिसके आधार पर नियमितीकरण के आदेश जारी होंगे।

पहले चरण में इनका नियमितीकरण

इस चरण में करीब 78 कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। ये कर्मचारी अलग-अलग समूहों में हाईकोर्ट पहुंचे थे।

4 कर्मचारियों का एक समूह

22 कर्मचारियों का दूसरा समूह

54 कर्मचारियों का तीसरा समूह

कर्मचारियों का तर्क था कि निगम ने पद नहीं होने का हवाला देकर उन्हें नियमित नहीं किया, जबकि 2011 और 2014 में कई कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है।

नए अधिकारियों से जगी आस

निगम कर्मचारी नेताओं का कहना है कि मौजूदा अधिकारी कोर्ट गए कर्मचारियों की पीड़ा को समझ रहे हैं। इससे पहले सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के तत्कालीन अधिकारियों पर कर्मचारियों को गुमराह करने के आरोप लगे थे। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद फाइलें आगे नहीं बढ़ाई गईं, जिसे लेकर लालाराम कोली और सीबी मिश्रा के खिलाफ लिखित शिकायत भी की गई थी।