शंकराचार्य विवाद में दूसरा इस्तीफा: योगी समर्थन में अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर ने छोड़ी कुर्सी, पत्नी से बोले— “जिसका नमक खाया, उसका साथ देना चाहिए”
प्रयागराज के माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूपी प्रशासन के बीच जारी खींचतान में अब एक अफसर की एंट्री हो गई है. सीएम योगी का अपमान करने पर अयोध्या के एक अधिकारी ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है.
शंकराचार्य विवाद में बड़ा कदम: योगी समर्थन में अयोध्या डिप्टी कमिश्नर का इस्तीफा, भावुक शब्दों में कहा— “निष्ठा सबसे ऊपर”
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफा के बाद अब अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपना इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने रोते हुए अपना दर्द बयां किया है।
शंकराचार्य विवाद के बीच अयोध्या से एक बड़ा प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है। जीएसटी विभाग में तैनात डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह इस्तीफा राज्यपाल को भेजा है, जो दो पन्नों का बताया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में नौकरी छोड़ने का फैसला लिया है। इससे पहले सोमवार को शंकराचार्य विवाद और यूजीसी को लेकर बरेली सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार ने इस्तीफा दे दिया था। यूपी में यह दूसरा इस्तीफा सामने आया है।
प्रशांत कुमार सिंह ने अपने बयान में कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर की गई अभद्र टिप्पणी से वे गहरे आहत हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस प्रदेश का नमक खाता हूं और जिस प्रदेश से मुझे वेतन मिलता है, मैं उसका पक्षधर हूं। उन्होंने कहा कि सीएम योगी एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुने गए मुख्यमंत्री हैं और उनका इस तरह अपमान किया जाना वह बर्दाश्त नहीं कर सकते।
अपने सिद्धांतों के आधार पर पद छोड़ने का फैसला किया
डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि वह पिछले तीन दिनों से इस बयान को लेकर मानसिक रूप से व्यथित थे। अंततः उन्होंने आत्मसम्मान और अपने सिद्धांतों के आधार पर पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह इस्तीफा किसी दबाव में नहीं, बल्कि स्वेच्छा से दिया गया निर्णय है।प्रशांत कुमार सिंह ने आगे कहा कि जब उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाएगा, तब वे अपने निजी संसाधनों से सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से योगदान देंगे। उन्होंने समाज और राष्ट्रहित में कार्य करते रहने की प्रतिबद्धता भी जताई। इस इस्तीफे के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। इसे शंकराचार्य विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसने प्रदेश की राजनीति में पहले ही तीखी बहस छेड़ रखी है। अयोध्या जैसे संवेदनशील और धार्मिक महत्व के शहर से आए इस इस्तीफे को अहम घटनाक्रम माना जा रहा है।
प्रशांत कुमार सिंह का कहना है कि वे जिस प्रदेश की सेवा कर रहे हैं। उसी के वेतन से उनका परिवार चलता है। ऐसे में प्रदेश के मुखिया के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग उन्हें स्वीकार नहीं है। उन्होंने कहा कि वे एक सरकारी कर्मचारी हैं और नियमों से बंधे होने के बावजूद उनकी भी भावनाएं हैं। बीते दो दिनों से वे मानसिक पीड़ा में थे और इसी कारण उन्होंने इस्तीफा देने का फैसला किया।
इस्तीफे के बाद पत्नी से फोन पर बात करते समय वे भावुक हो गए। बातचीत के दौरान उनका गला भर आया। वे रो पड़े। उन्होंने बताया कि पिछले दो रातों से वे सो नहीं पाए थे। और उनकी दो छोटी बेटियां हैं। जिनकी जिम्मेदारी भी उनके मन में लगातार चल रही थी।
इससे पहले सोमवार को शंकराचार्य और उनके शिष्यों के कथित अपमान तथा यूजीसी के नए रेगुलेशन के विरोध में बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। पीसीएस अफसर अलंकर ने इसे पूरी तरह सोच-समझकर लिया गया निर्णय बताया और साफ किया है कि वह किसी भी दबाव या समझाइश में आकर अपना इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। वहीं इसके बाद हलचल तेज है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस