सीएम मोहन यादव पर लगे कथित जमीन खरीद के आरोपों पर गरमाई सियासत, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का भाजपा पर तीखा हमला; बोले- 'ये मामा, महाराज या अमित शाह जी ने छपवाया है, हमें नहीं पता'

जयवर्धन सिंह ने महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से पहले मुख्यमंत्री परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों की जांच और इस पर सीएम से तत्काल पत्रकारवार्ता कर सफाई देने की मांग की

सीएम मोहन यादव पर लगे कथित जमीन खरीद के आरोपों पर गरमाई सियासत, कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह का भाजपा पर तीखा हमला; बोले- 'ये मामा, महाराज या अमित शाह जी ने छपवाया है, हमें नहीं पता'

जयवर्धन सिंह ने सीएम मोहन यादव पर लगे कथित जमीन खरीद के आरोपों को लेकर मांगी सफाई, NEET पेपर लीक और NTA पर भी केंद्र सरकार को घेरा; भाजपा में भीतरघात की आशंका जताते हुए कहा- 'ये मामा, महाराज या अमित शाह जी ने छपवाया है, हमें नहीं पता।'

भोपाल,जयवर्धन सिंह ने गुना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर लगे कथित जमीन खरीद और अनियमितताओं के आरोपों को लेकर जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में पहली बार किसी भाजपा मुख्यमंत्री पर भ्रष्टाचार से जुड़े इतने गंभीर आरोप सामने आए हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह खबर किसने बाहर पहुंचाई, यह तो पता नहीं, लेकिन इसमें भाजपा के भीतरघात की आशंका जरूर दिखाई देती है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल, ज्योतिरादित्य सिंधिया और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि शक की सुई कहीं न कहीं भाजपा के अंदरूनी मतभेदों की ओर इशारा करती है।

राघौगढ़ से कांग्रेस विधायक और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह 'शिक्षा बचाओ, भविष्य बचाओ' अभियान के तहत गुना पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने नीट परीक्षा, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए), शिक्षा व्यवस्था और मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस देशभर में छात्रों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आंदोलन चला रही है और 25 जून से शुरू हुआ 'छात्रों की गूंज' अभियान 9 अगस्त को दिल्ली में राहुल गांधी की मौजूदगी में समाप्त होगा।

जयवर्धन सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार पर लगे कथित जमीन खरीद के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से पहले खरीदी गई जमीनों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि यदि मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने कोई गलत काम नहीं किया है तो उन्हें स्वयं मीडिया के सामने आकर पूरे मामले की सच्चाई जनता के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी यह स्वीकार कर चुके हैं कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार ने कई जमीनें खरीदी हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के आरोपों का समर्थन करते हुए जयवर्धन सिंह ने कहा कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में बड़े पैमाने पर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि यादव परिवार की निजी जमीनों को सिंहस्थ 2028 से पहले सरकारी धन से विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि यह सही है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

उन्होंने भाजपा के अंदरूनी विवादों पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि यह जानकारी आखिर राष्ट्रीय स्तर के अखबार तक कैसे पहुंची। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि यह जानकारी भाजपा के ही किसी वरिष्ठ नेता ने बाहर पहुंचाई होगी। उनके अनुसार मुख्यमंत्री की चुप्पी पूरे मामले को और अधिक संदिग्ध बना रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयवर्धन सिंह ने नीट परीक्षा और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एनटीए ने परीक्षा प्रक्रिया को जानबूझकर निजी कंपनियों के हवाले कर दिया, जिससे छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ। उनका कहना था कि पेपर तैयार करने, उसकी प्रिंटिंग, परिवहन और परीक्षा केंद्रों के संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निजी एजेंसियों को सौंप दी गईं, जिनका संबंध भाजपा समर्थित लोगों से होने का आरोप कांग्रेस लगातार लगाती रही है।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों से परीक्षा शुल्क के नाम पर भारी रकम वसूल रही है, जबकि पेपर लीक होने के बाद भी छात्रों की फीस वापस नहीं की जाती। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न परीक्षाओं से सरकार जितनी राशि एकत्र कर रही है, वह देश के शिक्षा बजट के बराबर है। उनके अनुसार यह व्यवस्था युवाओं के साथ अन्याय है।

जयवर्धन सिंह ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और एनटीए अध्यक्ष प्रदीप जोशी के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि जब तक इन मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक छात्रों का भरोसा परीक्षा प्रणाली पर वापस नहीं आएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सीबीएसई की परीक्षा प्रक्रिया में पहले ब्लैकलिस्ट हो चुकी कंपनियों को भी नियमों की अनदेखी कर ठेके दिए गए।

एनटीए अध्यक्ष प्रदीप जोशी की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 से 2011 के दौरान मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में उनके कार्यकाल के समय प्रोफेसर भर्ती में गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। इसके बावजूद उन्हें पहले छत्तीसगढ़ पीएससी, फिर यूपीएससी और बाद में एनटीए की जिम्मेदारी दी गई। जयवर्धन सिंह ने कहा कि उनके कार्यकाल में लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है।

कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार हर क्षेत्र में आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रही है और शिक्षा व्यवस्था भी इससे अछूती नहीं रही। उनका कहना था कि सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारियां निजी कंपनियों को सौंपने से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों कमजोर हुई हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों, युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर पूरे देश में आंदोलन जारी रखेगी और सरकार से जवाब मांगती रहेगी।