ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, टीएमसी नेताओं ने नहीं किए साइन,कैसे हटाए जा सकते हैं स्पीकर

विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है. इसके लिए सांसदों का हस्ताक्षर शुरू हो गया है. विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया है. आइए जानते हैं लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया क्या है? यह अब तक कितनी बार आया है और इसका अंजाम क्या हुआ?

ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव, टीएमसी नेताओं ने नहीं किए साइन,कैसे हटाए जा सकते हैं स्पीकर

सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म होता दिख रहा है. दो बजे से संसद सुचारू रूप से चल सकती है. विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है.

नई दिल्ली:No-Confidence Motion Against Lok Sabha Speaker: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में जुटा है. अविश्वास प्रस्ताव पर सांसदों ने हस्ताक्षर करना शुरू कर दिया गया है. कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने कहा कि कल वो अविश्वास प्रस्ताव को लेकर नोटिस देंगे. विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर ने सदन की कार्यवाही में पक्षपाती रवैया अपनाया है और विपक्ष की आवाज़ को दबाया है. कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, "स्पीकर साहब का खुद निरादर किया गया है. स्पीकर साहब पर दबाव है कि उनको खुद बयान देना पड़ रहा है जो सही नहीं है. सवाल ही नहीं उठता कि पीएम पर कोई हमला करे. सरकार द्वारा उन पर दबाव डाला गया है इसलिए उन्होंने ये कहा है क्योंकि उस दिन पीएम मोदी की हिम्मत नहीं हुई सदन में आने की. इसलिए स्पीकर सफाई दे रहे हैं, ये गलत बात है."

विपक्ष ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया. बिरला ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर सदन में राहुल गांधी और दूसरे विपक्षी नेताओं को बोलने से रोका था. विपक्ष ने नोटिस में कहा है कि सदन में स्पीकर की टिप्पणी से कांग्रेस सदस्यों पर साफ़ तौर पर झूठे आरोप लगे.

बहुत ही जरूरी कदम...'

कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर बी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "विपक्ष ने संवैधानिक मर्यादा में अपना भरोसा रखा है. माननीय स्पीकर का पर्सनल सम्मान करते हुए भी, हम विपक्षी MPs को पब्लिक इंपॉर्टेंस के मुद्दे उठाने का मौका लगातार न देने से दुखी और परेशान हैं. कई सालों के बाद, स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस नोटिस दिया गया है. यह एक बहुत ही जरूरी कदम है."

सांसदों का निलंबन और विवादित बयान

विपक्ष ने आठ सांसदों के निलंबन को भी इस प्रस्ताव का आधार बनाया है. इसके अलावा बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे द्वारा पूर्व प्रधानमंत्रियों पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों पर भी कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया है. एक और बड़ा मुद्दा उस बयान को लेकर है, जिसमें स्पीकर ने कहा था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था, ताकि कोई अप्रिय घटना न हो. विपक्ष का कहना है कि यह बयान अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है. 

TMC ने साइन क्यों नहीं किया?

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल कांग्रेस (TMC) के रुख को लेकर हो रही है.TMC ने फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने साफ कहा कि पार्टी कांग्रेस के कदम से असहमत नहीं है, लेकिन उसका मानना है कि सबसे पहले सभी विपक्षी दलों को स्पीकर को एक संयुक्त पत्र लिखना चाहिए था. टीएमसी चाहती थी कि स्पीकर को 2 से 3 दिन का समय दिया जाए.अगर इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती, तो पार्टी अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सकती है.

TMC का तर्क क्या है?

अभिषेक बनर्जी ने यह भी कहा कि सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित करना सही नहीं था. अगर सत्तापक्ष के सांसदों को बोलने दिया जा सकता है, तो विपक्ष को भी बराबर मौका मिलना चाहिए. TMC का कहना है कि वह चाहती है कि संसद चले, लेकिन इसकी जिम्मेदारी स्पीकर की होती है. 

नियमों के अनुसार, नोटिस मिलने की तारीख से कम त्ते कम 14 दिन बाद किसी दिन सदन की कार्यसूची में शामिल किया जाता है। इसके बाद सदन में प्रस्ताव रखा जाता है और इसके समर्थन में कम से कम 50 सांसदों का खड़े होना जरूरी होता है। आवश्यक समर्थन मिल जाता है, तो प्रस्ताव पर सदन में बहस होती है और इसके बाद वोटिंग कराई जाती है। बहुमत से प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में ही स्पीकर को पद से हटाया जा सकता है।