मोहन सरकार बदलेगी 25 साल पुराना नियम,MP में सरकारी नौकरी के लिए हटाई जाएगी अधिकतम दो बच्चों की शर्त, कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

कर्मचारियों के लिए दो बच्चों के नियमों में संशोधन करने जा रही मध्य प्रदेश सरकार. नए कर्मचारियों के लिए लागू किए गए परिवीक्षा अवधि को लेकर भी होगा संशोधन.

मोहन सरकार बदलेगी 25 साल पुराना नियम,MP में सरकारी नौकरी के लिए हटाई जाएगी अधिकतम दो बच्चों की शर्त, कैबिनेट में आएगा प्रस्ताव

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए अधिकतम दो बच्चों की शर्त हटाने का प्रस्ताव तैयार है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से परामर्श के बाद यह संशोधन किया है। इसके अतिरिक्त, परिवीक्षा अवधि पूरी होने के छह माह के भीतर कर्मचारियों को नियमित करने का भी प्रस्ताव है। ये बदलाव कर्मचारियों को लाभ पहुंचाएंगे, हालांकि पूर्व में बर्खास्त हुए कर्मियों को राहत नहीं मिलेगी।

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार अब प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए मुसीबत बने एक नियम को बदलने जा रही है. राज्य सरकार कर्मचारियों के लिए दो बच्चों के नियमों में संशोधन करने जा रही है. सामान्य प्रशासन विभाग ने विधि विभाग से सलाह के बाद इसमें संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है.

इस प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा. उधर राज्य सरकार नए कर्मचारियों के लिए लागू किए गए परिवीक्षा अवधि को लेकर भी संशोधन करने जा रहा है. इन दोनों नियमों में बदलाव से कर्मचारियों को बड़ा फायदा होगा.

दो बच्चों की शर्त में होगा बदलाव

जनसंख्या दर में बढ़ोत्तरी को देखते हुए 26 जनवरी 2001 को तत्कालीन दिग्विजय सिंह सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए दो बच्चे की पॉलिसी लागू की थी. इसमें प्रावधान किया गया था कि यदि किसी अभ्यर्थी के तीन बच्चे हैं, तो उसे सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य माना जाएगा. इसी तरह यदि शासकीय नौकरी में रहते हुए तीसरे बच्चे का जन्म हुआ तो उसकी सेवा समाप्त कर दी जाएगी.

2001 के बाद कई सरकारें बदलती गई, लेकिन इस नियम में कोई बदलाव नहीं किया गया. उधर सेवा में रहते हुए तीसरी संतान की वजह से कई कर्मचारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा है. हालांकि अब राज्य सरकार इसमें संशोधन करने जा रही है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम बुलेटन 2023 को आधार बनाया गया है.

इस बुलेटन के मुताबिक मध्य प्रदेश की कुल प्रजनन दर 2.4 है, जो भारत की टीएफआर 1.9 से अधिक है. शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.8 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.6 है. इस तरह के नियम में राजस्थान और छत्तीसगढ़ सरकार पहले ही संशोधन कर चुकी है. अब मध्य प्रदेश सरकार भी नियम में संशोधन की तैयारी कर रही है.

परिवीक्षा अवधि में होगा संशोधन

उधर राज्य सरकार कर्मचारियों की परिवीक्षा अवधि को लेकर भी संशोधन करने जा रही है. अभी कर्मचारियों को परिवीक्षा अवधि खत्म होने के बाद भी नियमित होने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, लेकिन अब राज्य सरकार इसके लिए समय सीमा तय करने जा रही है. अब कर्मचारी परिवीक्षा अवधि खत्म होने के छह माह के अंदर नियमित कर दिए जाएंगे. इससे कर्मचारियों की वेतनवृद्धि में किसी तरह की परेशानी नहीं आएगी. कमलनाथ सरकार द्वारा नियुक्त सरकारी कर्मचारियों के लिए तीन साल की परिवीक्षा अवधि का प्रावधान किया गया था. तीन साल खत्म होने के बाद ही कर्मचारियों को पूरी वेतन मिलती है.