फिर 5 हजार करोड़ का कर्ज लेकर घिरी मोहन सरकार, कमलनाथ का हमला—“भाजपा ने MP को कर्ज प्रदेश बना दिया”
मध्य प्रदेश सरकार ने बजट सत्र से पहले एक बार फिर 5 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी बड़ी उधारी है। बढ़ते कर्ज को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश को कर्ज के बोझ में डुबो दिया गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार से वित्तीय स्थिति और बढ़ती उधारी पर स्पष्ट रोडमैप पेश करने की मांग की है।
MP पर बढ़ता कर्ज का पहाड़, मोहन सरकार पर कमलनाथ का सीधा वार
उधारी की रफ्तार तेज: 7 दिन में 10,300 करोड़ का कर्ज, सरकार घिरी सवालों में
कर्ज में डूबता मध्यप्रदेश? बजट सत्र से पहले सरकार ने फिर उठाए 5 हजार करोड़
‘राज्य को कर्ज के दलदल में धकेल रही सरकार’—कमलनाथ का तीखा हमला
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र से ठीक पहले राज्य की मोहन सरकार ने बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज उठाया है। यह एक सप्ताह के भीतर लिया गया दूसरा बड़ा कर्ज है। इससे पहले 4 फरवरी को सरकार 5300 करोड़ रुपये की उधारी ले चुकी है। लगातार बढ़ती उधारी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राज्य को कर्ज के बोझ में डुबो रही है। उन्होंने दावा किया कि भारतीय रिज़र्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है, जो देश के कुल कर्ज का लगभग 5 प्रतिशत है। कमलनाथ ने कहा कि वर्ष 2007 में प्रदेश पर 52 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब करीब दस गुना बढ़कर 5 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है।
उन्होंने सरकार पर फिजूलखर्ची और इवेंट आधारित राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि बुनियादी जरूरतों की पूर्ति के बजाय सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है। कमलनाथ ने राज्य सरकार से राजकोषीय स्थिति पर गंभीरता से विचार कर सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की।
उमंग सिंघार ने भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी बजट सत्र से पहले कर्ज लेने को गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि चालू वित्त वर्ष में अब तक 67,300 करोड़ रुपये की उधारी और 36 बार कर्ज लिया जाना राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
सिंघार ने कहा कि हालिया RBI रिपोर्ट के अनुसार देश के कुल कर्ज का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश पर है, जो चिंताजनक स्थिति दर्शाता है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट वित्तीय रोडमैप पेश करने की मांग की और कहा कि आगामी बजट सत्र में बढ़ते कर्ज, ब्याज के बोझ और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर विस्तृत जवाब मांगा जाएगा।
विपक्ष का कहना है कि प्रदेश को कर्ज के बोझ से बाहर निकालने के लिए मजबूत, जवाबदेह और दूरदर्शी आर्थिक नीति की आवश्यकता है।
10 फरवरी को लिए गए 5 हजार करोड़ रुपये के कर्ज को तीन हिस्सों में बांटा गया है। इनमें से दो-दो हजार करोड़ रुपये के दो कर्ज क्रमशः 21 साल और 16 साल की अवधि के लिए लिए गए हैं। वहीं, 1000 करोड़ रुपये का तीसरा कर्ज 8 साल की अवधि का है। इस पर सरकार को छमाही आधार पर ब्याज का भुगतान करना होगा। राज्य सरकार का कहना है कि यह उधारी विकास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन जुटाने का हिस्सा है और वित्तीय अनुशासन के दायरे में रहकर ही कर्ज लिया जा रहा है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस