MSME संकट का समाधान आयकर की सज़ा नहीं, ‘इनवॉइस–पेमेंट लिंकिंग’ है: टेक्सटाइल & गारमेंट कमेटी CAIT,धारा 43B(h) से डर का माहौल; 80% वर्किंग कैपिटल वाले ट्रेड क्रेडिट को पारदर्शी बनाना ज़रूरी – चम्पालाल बोथरा

देश के MSME गंभीर संकट में हैं, जिसका मुख्य कारण ऑर्डर की कमी नहीं बल्कि समय पर भुगतान न मिलना है। CAIT की टेक्सटाइल व गारमेंट कमेटी के चेयरमैन चम्पालाल बोथरा के अनुसार आयकर अधिनियम की धारा 43B(h) इस समस्या का समाधान नहीं करती, क्योंकि यह केवल 20% बैंक ऋण पर केंद्रित है, जबकि MSME की वास्तविक जीवनरेखा 80% ट्रेड क्रेडिट है।

MSME संकट का समाधान आयकर की सज़ा नहीं, ‘इनवॉइस–पेमेंट लिंकिंग’ है:   टेक्सटाइल & गारमेंट कमेटी CAIT,धारा 43B(h) से डर का माहौल; 80% वर्किंग कैपिटल वाले ट्रेड क्रेडिट को पारदर्शी बनाना ज़रूरी – चम्पालाल बोथरा

धारा 43B(h) से MSME में डर और अनिश्चितता, तकनीक आधारित भुगतान सुरक्षा से ही समय पर भुगतान संभव

Suart,देश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) आज जिस गहरे संकट से जूझ रहे हैं, उसका मूल कारण ऑर्डर की कमी नहीं, बल्कि भुगतान समय पर न मिलना है।
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल व गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री चम्पालाल बोथरा ने कहा कि आयकर अधिनियम की धारा 43B(h) इस समस्या का समाधान नहीं है, क्योंकि यह केवल बैंक ऋण (लगभग 20%) पर केंद्रित है, जबकि व्यापार की वास्तविक नींव ‘ट्रेड क्रेडिट’ (लगभग 80%) है, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है।
 बोथरा ने स्पष्ट किया कि टेक्सटाइल, गारमेंट और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भुगतान चक्र स्वाभाविक रूप से 60 से 120 दिनों का होता है। ऐसे में 45 दिन की बाध्यता व्यवहारिक नहीं है और यह MSME को अनजाने में अपराधी बना रही है।
धारा 43B(h) के 
नियम के कारण:
   •   व्यापारिक संकुचन: खरीदार आयकर दंड से बचने के लिए MSME के बजाय बड़े उद्योगों को प्राथमिकता देने लगे हैं।
   •   MSME से पलायन: कई उद्यमी MSME रजिस्ट्रेशन से बाहर निकलने पर मजबूर हो रहे हैं।
   •   निवेश में गिरावट: अनिश्चितता और डर के माहौल में छोटे उद्यमी नया निवेश रोक रहे हैं, जिससे “वोकल फॉर लोकल” और स्थानीय रोज़गार प्रभावित हो रहा है।
*CAIT  टेक्सटाइल & गारमेंट कमेटी का व्यावहारिक और वैज्ञानिक समाधान: ‘डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर’*
पॉलिसी और बाजार के आंकड़ों के अनुसार, MSME की तरलता के लिए बैंक ऋण से कहीं अधिक महत्वपूर्ण ‘ट्रेड क्रेडिट’ है। इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए CAIT ने सरकार को निम्नलिखित 5 ठोस और व्यावहारिक सुझाव दिए हैं:
1️⃣ इनवॉइस–पेमेंट डिजिटल लिंकिंग
GSTN और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ा जाए, ताकि यह स्पष्ट रूप से प्रमाणित हो सके कि MSME इनवॉइस का भुगतान समय पर, देरी से, या अभी तक नहीं हुआ है। यह तकनीक आधारित समाधान “लाइव कैश-फ्लो ट्रुथ” सामने लाएगा।
2️⃣ भुगतान व्यवहार आधारित क्रेडिट रेटिंग
कंपनियों की क्रेडिट योग्यता पुरानी बैलेंस शीट के बजाय उनके वर्तमान भुगतान व्यवहार (Payment Discipline) के आधार पर तय की जाए।
3️⃣ अच्छे भुगतानकर्ताओं को प्रोत्साहन
जो खरीदार समय पर भुगतान करें, उन्हें:
   •   आसान बैंक ऋण
   •   बेहतर क्रेडिट रेटिंग
   •   सरकारी योजनाओं और टेंडरों में प्राथमिकता दी जाए।
4️⃣ पारदर्शी डेटा व अर्ली वार्निंग सिस्टम
जो कंपनियाँ बार-बार भुगतान में देरी करती हैं, उनकी पहचान सिस्टम में स्पष्ट दिखे, ताकि MSME पहले से सतर्क होकर व्यापारिक निर्णय ले सकें।
5️⃣ सेक्टर-वार लचीली नीति
हर उद्योग की प्रकृति अलग होती है। इसलिए एक ही भुगतान नियम सभी सेक्टरों पर लागू न किया जाए, बल्कि सेक्टर-वार व्यवहारिक भुगतान अवधि तय की जाए।
बोथरा ने जोर देकर कहा कि MSME को डराकर नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से समय पर भुगतान की गारंटी देकर ही देश की अर्थव्यवस्था मजबूत की जा सकती है।
CAIT की  टेक्सटाइल & गारमेंट कमेटी की केंद्र सरकार से स्पष्ट मांग
   •   आयकर अधिनियम की धारा 43B(h) को तत्काल स्थगित या संशोधित किया जाए।
   •   ग्राउंड रियलिटी के आधार पर एक नया, व्यावहारिक और तकनीक-आधारित “पेमेंट प्रोटेक्शन एक्ट” बनाया जाए, जो MSME को वास्तविक सुरक्षा प्रदान करे।