मोहन यादव सरकार में बड़ा फेरबदल संभव: कई मंत्रियों की हो सकती है विदाई, नए चेहरों को मिल सकती है जगह
मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में जून के अंत तक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक फेरबदल होने जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक 20 से 30 जून के बीच 5 से 6 मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है, जबकि 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिलेगा. इस बड़े बदलाव में वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को हटाकर राज्यसभा भेजे जाने की भी चर्चा तेज है.
कैबिनेट फेरबदल में जिन मंत्रियों पर सबसे ज्यादा नजरे हैं उनमें कैलाश विजयवर्गीय भी शामिल हैं। कैबिनेट में सबसे वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल कैलाश विजयवर्गीय को लेकर अटकलें हैं कि उन्हें राज्यसभा भेजा जा सकता है। वहीं प्रह्लाद सिंह को केंद्रीय संगठन में अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। बताया जाता है कि वरिष्ठता की वजह से ये मंत्री कैबिनेट में सहज नहीं हैं।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में आगामी दिनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार का पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार और फेरबदल जून के अंतिम सप्ताह में होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि 20 से 30 जून के बीच मंत्रिमंडल में व्यापक बदलाव किए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो दिसंबर 2023 में सरकार गठन के बाद यह मंत्रिपरिषद का पहला बड़ा पुनर्गठन होगा।
वर्तमान में मुख्यमंत्री सहित कुल 31 सदस्यीय मंत्रिमंडल कार्यरत है। पार्टी संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर लगातार समीक्षा बैठकों के बाद यह माना जा रहा है कि सरकार अब आगामी चुनावी चुनौतियों और संगठनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई रणनीति पर काम कर रही है। इसी के तहत कुछ वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां देने और कुछ नए चेहरों को मौका देने की तैयारी की जा रही है।
कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद सिंह पटेल को मिल सकती है नई जिम्मेदारी
राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर हो रही है। सूत्रों का दावा है कि उन्हें मंत्रिमंडल से हटाकर राज्यसभा भेजा जा सकता है। विजयवर्गीय भाजपा के राष्ट्रीय स्तर के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में पार्टी उन्हें नई भूमिका देने पर विचार कर सकती है।
वहीं वरिष्ठ मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल को भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलने की अटकलें तेज हैं। माना जा रहा है कि भाजपा आगामी राजनीतिक रणनीति को ध्यान में रखते हुए अनुभवी नेताओं का उपयोग संगठनात्मक मजबूती के लिए करना चाहती है। इसी कारण कुछ वरिष्ठ नेताओं को सरकार से हटाकर संगठन में महत्वपूर्ण दायित्व दिए जा सकते हैं।
प्रदर्शन और विवाद भी बन सकते हैं कारण
सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल में संभावित बदलाव केवल राजनीतिक समीकरणों के आधार पर नहीं होगा, बल्कि मंत्रियों के प्रदर्शन और सार्वजनिक छवि को भी ध्यान में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल के महीनों में विभिन्न विभागों के कामकाज की समीक्षा की है। शासन की प्राथमिकताओं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं करने वाले मंत्रियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
विवादित बयानों के कारण लगातार चर्चा में रहे मंत्री विजय शाह की स्थिति सबसे ज्यादा चर्चा में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार अपनी छवि को लेकर बेहद सतर्क है और ऐसे नेताओं पर कार्रवाई का संदेश देना चाहती है जिनकी वजह से सरकार को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है।
इसके अलावा पंचायती राज मंत्री राधा सिंह, शहरी विकास एवं प्रबंधन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी तथा वन राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार के नाम भी संभावित फेरबदल की चर्चाओं में शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर रहेगा फोकस
मंत्रिमंडल विस्तार का सबसे महत्वपूर्ण पहलू क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व आगामी चुनावों और संगठनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना चाहता है।
सूत्रों का कहना है कि बुंदेलखंड, महाकौशल, मालवा और ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को लेकर गंभीर विचार-विमर्श चल रहा है। साथ ही पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला वर्ग के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
सागर जिले से मिल सकता है प्रतिनिधित्व
संभावित नए चेहरों में सागर जिले के नेताओं के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन और प्रदीप लारिया में से किसी एक को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है। दोनों नेताओं का संगठन में अच्छा प्रभाव माना जाता है और क्षेत्रीय संतुलन के लिहाज से भी उनका नाम मजबूत माना जा रहा है।
इसके अलावा केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले प्रमुराम चौधरी का नाम भी संभावित मंत्रियों की सूची में बताया जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिंधिया समर्थक नेताओं को अधिक प्रतिनिधित्व देकर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में पार्टी की स्थिति और मजबूत करने की रणनीति बनाई जा सकती है।
पुराने चेहरों की वापसी की भी चर्चा
पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह की मंत्रिमंडल में वापसी की अटकलें भी तेज हैं। भाजपा संगठन में उनकी सक्रियता और अनुभव को देखते हुए उन्हें पुनः जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी नेतृत्व अनुभवी नेताओं और युवा चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर सकता है।
युवा और महिला नेताओं को मिल सकता है मौका
भाजपा आगामी विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर भी काम कर रही है। यही कारण है कि इस बार कुछ नए और अपेक्षाकृत युवा विधायकों को मंत्री पद दिया जा सकता है।
महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने पर भी जोर रहने की संभावना है। पार्टी चाहती है कि सरकार में महिलाओं की भागीदारी अधिक दिखाई दे, जिससे महिला मतदाताओं के बीच सकारात्मक संदेश जाए। इसके अलावा आदिवासी समुदाय से आने वाले नेताओं को भी प्रमुख स्थान दिए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
विभागों में भी हो सकता है बड़ा बदलाव
मंत्रियों के चेहरे बदलने के साथ-साथ कई विभागों का पुनर्वितरण भी संभव माना जा रहा है। सरकार के कुछ महत्वपूर्ण विभागों में नए मंत्रियों की नियुक्ति की जा सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रशासनिक दक्षता और बेहतर परिणामों के आधार पर विभागों का पुनर्गठन कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल केवल चेहरों का बदलाव नहीं होगा, बल्कि सरकार की कार्यशैली और प्राथमिकताओं को भी नया स्वरूप देने वाला कदम साबित हो सकता है।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर भाजपा या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सभी चर्चाएं राजनीतिक सूत्रों और अंदरूनी जानकारियों पर आधारित हैं। हालांकि जिस तरह से संगठन और सरकार के स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं, उससे यह संकेत जरूर मिल रहे हैं कि जून के अंतिम सप्ताह में मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।
यदि यह फेरबदल होता है तो यह मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार का अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव माना जाएगा, जिसका असर प्रदेश की राजनीति और सत्ता संतुलन पर दूरगामी रूप से देखने को मिल सकता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस