100 से 335 एकड़ तक पहुंची जमीन! जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव पर उठाए बड़े सवाल, सुप्रीम कोर्ट जांच और इस्तीफे की मांग

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उज्जैन में कथित जमीन घोटाले का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे महाकाल की जमीन की लूट बताया है। उन्होंने इस मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग करते हुए सीएम मोहन यादव से इस्तीफा मांगा है।

100 से 335 एकड़ तक पहुंची जमीन! जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव पर उठाए बड़े सवाल, सुप्रीम कोर्ट जांच और इस्तीफे की मांग

कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा कि साल 2021 में मोहन यादव मंत्री बने और दिसंबर 2023 में सीएम बने. साल 2021 से 2025 के बीच परिवार की ओर से 253 एकड़ जमीन खरीदी गई.

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की जमीन खरीद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari ने मुख्यमंत्री पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों की जमीनों में असामान्य वृद्धि हुई है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने दिसंबर 2023 से अब तक उज्जैन में लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत से 168 एकड़ क्षेत्र में फैले 137 प्लॉट खरीदे हैं। पटवारी का आरोप है कि परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर कुल 245 प्लॉटों में लगभग 335 एकड़ जमीन दर्ज है।

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि यदि मुख्यमंत्री और उनके परिवार के पास पहले करीब 100 एकड़ जमीन थी, तो मंत्री और बाद में मुख्यमंत्री बनने के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 335 एकड़ कैसे पहुंच गया। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि इतनी कम अवधि में भूमि स्वामित्व में इतनी बड़ी वृद्धि किन परिस्थितियों में हुई।

पटवारी के अनुसार परिवार के विभिन्न सदस्यों के नाम पर बड़ी मात्रा में जमीन दर्ज है। उन्होंने दावा किया कि नीलेश यादव के नाम 108 एकड़, गोविंद यादव के नाम 47 एकड़, मोहन यादव के नाम 17 एकड़, सीमा यादव के नाम 11 एकड़, वैभव यादव के नाम 17 एकड़ सहित अन्य रिश्तेदारों के नाम पर भी बड़ी मात्रा में जमीन मौजूद है। कांग्रेस का आरोप है कि परिवार से जुड़ी चार रियल एस्टेट कंपनियों का भी इस पूरे मामले में उल्लेख सामने आया है, जिनमें मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव और अन्य परिजनों की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बताई जा रही है।

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि खरीदी गई कई जमीनें उन इलाकों में स्थित हैं जहां सड़क परियोजनाएं, मास्टर प्लान विस्तार या भूमि उपयोग परिवर्तन जैसी सरकारी योजनाओं का प्रभाव पड़ा है। पटवारी ने सवाल किया कि क्या यह केवल संयोग है या फिर विकास परियोजनाओं की जानकारी पहले से होने के कारण निवेश किया गया। उन्होंने सरकार से ऐसे सभी क्षेत्रों की सूची सार्वजनिक करने की मांग की जहां परिवार या संबंधित कंपनियों ने जमीन खरीदी है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से कई सीधे सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि क्या मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने 137 प्लॉट खरीदकर 168 एकड़ जमीन हासिल की, क्या सरकारी परियोजनाओं से प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर भूमि खरीदी गई, और क्या सरकार इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश से कराने के लिए तैयार है।

कांग्रेस नेता ने यह भी जानना चाहा कि क्या मुख्यमंत्री कार्यालय ने यह सुनिश्चित किया था कि जिन क्षेत्रों में परिवार की जमीन है, वहां से जुड़े सरकारी निर्णयों से मुख्यमंत्री स्वयं को अलग रखें। साथ ही उन्होंने परिवार से जुड़ी कंपनियों का पूरा विवरण सार्वजनिक करने, फॉरेंसिक ऑडिट कराने और भूमि सौदों से हुए संभावित आर्थिक लाभ की जानकारी सामने लाने की मांग की।

पटवारी ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का दावा करने वाली भाजपा को इस मामले में भी पारदर्शिता दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि आरोप निराधार हैं तो सरकार स्वतंत्र न्यायिक जांच से पीछे क्यों हटे।

फिलहाल मुख्यमंत्री Mohan Yadav या भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएगी। इस बीच प्रदेश की राजनीति में जमीन खरीद और संभावित हितों के टकराव को लेकर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस न्यायिक जांच की मांग पर अड़ी हुई है, जबकि भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।