राहुल गांधी के सामने खड़े हुए दिग्विजय सिंह, कांग्रेस की रणनीति पर ही उठा दिए सवाल बोले,कई राज्यों में हमारा संगठन बेहद कमजोर
दिग्विजय ने एक-एक मुद्दा इतने सीधे तरीके से रखा कि कमरे में सन्नाटा छा गया. राहुल गांधी और खरगे ने बात सुनी, लेकिन कोई तत्काल जवाब सामने नहीं आया. मुकुल वासनिक ने भी पहले ही बैठक में पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे. इसके बाद दिग्विजय का बोलेना, दरअसल यही दिखाता है कि कांग्रेस के भीतर अफसरशाही और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा गैप है.
एसआईआर पर कांग्रेस की बड़ी बैठक हुई. इसमें दिग्विजय सिंह ने संगठन की कमजोरी और बीएलए की कमी पर सवाल उठाए. सूत्रों का कहना है कि सिंह ने बैठक में कहा, बीएलए की बात हो रही है लेकिन हमारे पास बीएलए हैं कहां? संगठन ही कई जगह बेहद कमजोर है. बीजेपी और चुनाव आयोग से निपटने के लिए संगठन ही नहीं है.
एसआईआर पर कांग्रेस की बड़ी बैठक हुई. इसमें दिग्विजय सिंह ने संगठन की कमजोरी और बीएलए की कमी पर सवाल उठाए. सूत्रों का कहना है कि सिंह ने बैठक में कहा, बीएलए की बात हो रही है लेकिन हमारे पास बीएलए हैं कहां? संगठन ही कई जगह बेहद कमजोर है. बीजेपी और चुनाव आयोग से निपटने के लिए संगठन ही नहीं है.राहुल गांधी के सामने SIR पर चल रही थी बैठक में दिग्विजय ने एक-एक मुद्दा इतने सीधे तरीके से रखा कि कमरे में सन्नाटा छा गया. राहुल गांधी और खरगे ने बात सुनी, लेकिन कोई तत्काल जवाब सामने नहीं आया. मुकुल वासनिक ने भी पहले ही बैठक में पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे. इसके बाद दिग्विजय का बोलेना, दरअसल यही दिखाता है कि कांग्रेस के भीतर अफसरशाही और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा गैप है.
दिल्ली में कांग्रेस की अहम बैठक चल रही थी. एजेंडा था SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन, जिसे लेकर पार्टी अपनी रणनीति और तैयारी पर चर्चा कर रही थी. राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद थे, लेकिन अचानक माहौल तब बदल गया जब वरिष्ठ नेता और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य दिग्विजय सिंह ने खुलकर पार्टी की रणनीति पर ही सवाल उठा दिए. सूत्रों के मुताबिक, दिग्विजय सिंह ने एसआईआर पर सिर्फ तकनीकी सवाल ही नहीं उठाए, बल्कि वो सीधे संगठन की कमजोरी पर बोल पड़े.
सूत्रों के मुताबिक, वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक ने एसआईआर पर सवाल उठाए. गड़बड़ियां गिनाईं. ये भी बताया कि कैसे हम इस संकट से लड़ सकते हैं. इसके तुरंत बाद दिग्विजय सिंह खड़े हुए. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने कहा- बीएलए (Booth Level Agent) की बात की जा रही है, लेकिन हमारे पास हैं कहां? बीएलए एसआईआर में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. बीजेपी और अन्य पार्टियां इन्हें बूथ-बूथ पर तैनात कर रही हैं, लेकिन दिग्विजय का सवाल यही था कि कई राज्यों में कांग्रेस के पास पर्याप्त BLA हैं ही नहीं. यूपी जैसे बड़े राज्य में बूथ एजेंट ही नहीं, बिहार में भी हालत यही है. यानी SIR की तैयारी तो दूर, कांग्रेस अपने बूथ एजेंट ढूंढने में ही पिछड़ रही है.
SIR पर बीजेपी की चाल
दिग्विजय सिंह ने बैठक में आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ी करके बीजेपी और चुनाव आयोग खुलेआम मनमानी कर रहे हैं. उनका कहना था कि मतदाता सूची में नाम काटने का खेल चल रहा है और कांग्रेस के पास इसका जवाब देने वाला मजबूत तंत्र ही नहीं है. हमारा संगठन ही कई राज्यों में बेहद कमजोर है. दिग्विजय सिर्फ सिस्टम या BJP पर नहीं, बल्कि अपने ही संगठन के ढांचे पर बोले. उन्होंने कहा, कई राज्यों में संगठन बेहद कमजोर है. बूथ तक पहुंचने वाली कोई व्यवस्था नहीं है. जमीन पर कार्यकर्ता कम, डेटा और रणनीति बस कागज पर नजर आ रही है.
दिग्विजय का ‘विकल्प प्लान’
सूत्रों के मुताबिक, इतनी आलोचना के बाद दिग्विजय कोई समाधान भी लेकर आए. उन्होंने कहा, जब संगठन कमजोर है तो हर बूथ, हर गांव में पदयात्रा करो. जनता को जागरूक करो. यही इकलौता विकल्प है. यानी उनका सुझाव है कि कांग्रेस को पारंपरिक ढांचे पर भरोसा छोड़कर सीधा जनता से जुड़ना चाहिए और SIR को राजनीतिक मुद्दा बनाना चाहिए.
त्रों के मुताबिक, वरिष्ठ नेता मुकुल वासनिक की दो-टूक के बाद दिग्विजय बोले बीएलए की बात की जा रही है, लेकिन हमारे पास हैं कहां? हमारा संगठन ही कई राज्यों में बेहद कमजोर है. यूपी जैसे राज्यों में बीएलए बने ही नहीं हैं. बिहार में भी यही स्थिति रही. एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी करके बीजेपी और चुनाव आयोग खुलेआम गड़बड़ी कर रहे हैं. हमारे पास उससे निपटने के लिए संगठन ही नहीं है.
जब संगठन कमजोर है तो पदयात्रा की जाए
सूत्रों का ये भी कहना है कि दिग्विजय सिंह ने कहा कि जब संगठन कमजोर है तो फिर हर बूथ और गांव में पदयात्रा की जाए. जनता को जागरूक किया जाए. यही इकलौता विकल्प है. इससे पूरी तरह तो नहीं लेकिन काफी हद तक हम इस चोरी पर लगाम लगा सकते हैं.
सूत्रों का कहना है कि बैठक में राहुल गांधी ने कहा, साफ-सुथरी वोटर लिस्ट तैयार करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है. मगर, चुनाव आयोग राजनीतिक दलों पर ही ये जिम्मेदारी डालने की कोशिश कर रहा है. एसआईआर प्रक्रिया जल्दबाजी में अपनाई जा रही है. इसका मकसद असली मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाना है.
50 करोड़ से ज़्यादा वोटर्स गणना प्रपत्र मिले
बता दें कि चुनाव आयोग ने सोमवार को जानकारी दी थी कि 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 51 करोड़ वोटर्स में से 50 करोड़ से ज़्यादा वोटर्स को वोटर लिस्ट की चल रही एसआईआर प्रकिया के तहत गणना प्रपत्र मिल चुके हैं. जिन राज्यों में एसआईआर की कवायद जारी है, वो छत्तीसगढ़, गोवा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और लक्षद्वीप हैं.
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस