कलेक्टर या भाजपा कार्यकर्ता?RSS कार्यालय पहुंचे शिवम वर्मा,जीतू पटवारी बोले- BJP कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं अधिकारी

इंदौर के भागीरथपुरा जल त्रासदी के बीच एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के आरएसएस (RSS) कार्यालय जाने की तस्वीरों ने कांग्रेस को हमलावर होने का मौका दे दिया है.

कलेक्टर या भाजपा कार्यकर्ता?RSS कार्यालय पहुंचे शिवम वर्मा,जीतू पटवारी बोले- BJP कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं अधिकारी

इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के देर रात RSS ऑफिस पहुंचने की खबर सामने आई। एमपी कांग्रेस चीफ जीतू पटवारी ने इस पर कलेक्टर को चेतावनी दे डाली। उन्होंने कहा- राजनीतिक दलों के ऑफिस में जाकर ड्यूटी करोगे तो याद रखना...

भोपाल:इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के बुधवार देर रात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यालय पहुंचने को लेकर सियासी बवाल मचा हुआ है. असल में इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा मेयर पुष्यमित्र भार्गव के साथ संघ कार्यालय पहुंचे थे और करीब डेढ घंटे तक वहां रहे. हांलाकि ये पहला मामला नहीं है. इसके पहले मध्य प्रदेश के सतना कलेक्टर समेत 2 अधिकारियों ने संघ के कार्यक्रम में मौजूदगी दर्ज कराई थी और इसे लेकर विवाद खड़ा हुआ था. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इसे लेकर आपत्ति जताई है.

जीतू पटवारी बोले कलेक्टर असल में बीजेपी कार्यकर्ता

इंदौर में संघ कार्यालय में कलेक्टर शिवम वर्मा के पहुंचने पर कांग्रेस, कलेक्टर की कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) में शिकायत की तैयारी कर रही है.

कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि "इंदौर के महापौर आरएसएस के कार्यालय जाते हैं कलेक्टर को लेकर. ये अपने आप में कलेक्टर ने बता दिया कि वो प्रशासनिक अधिकारी नहीं हैं. कलेक्टर ने वहां जाकर ये जता दिया कि वो बीजेपी के कार्याकर्ता के रुप में ही काम कर रहा है. अगर आप राजनीतिक दलों के कार्यालय में जाकर काम करोगे तो आपकी काम करने की शैली को कांग्रेस का कार्यकर्ता ठीक कर देगा. आप बीजेपी के कार्यकर्ता के रूप में कार्यालय कैसे जा सकते हो."

ये कलेक्टर के विवेक पर निर्भर है कि वो कहां जाए'

पूर्व आईएएस राजीव शर्मा से ईटीवी भारत ने जब इस संबंध में बात की तो उनका कहना था कि "ये जो इंदौर का मामला है जिसमें कलेक्टर शिवम वर्मा के संघ कार्यालय पहुंचने की बात आई है. तो उस संबंध में मेरा स्पष्ट मत है कि ये किसी भी अधिकारी के स्वविवेक पर छोड़ देना चाहिए.

जब अधिकारी ऐसी पॉजीशन पर काम करते हैं तो ऐसी कई बार परिस्थितियां बनती हैं कि आपको दो अलग-अलग समुदाय के लोगों से मिलना पड़ता है. कई बार धार्मिक स्थलों पर भी जाना पड़ता है. तो ऐसे में मेरा ये मानना है कि ये अधिकारी के स्वविवेक पर छोड़ देना चाहिए . ये अधिकारी का हमेशा ही अपना निर्णय होता है और होना भी चाहिए. उन परिस्थियों से से निपटना भी उसे ही है."

2023 में भी सामने आया था एक मामला

इससे पहले भी मध्य प्रदेश में 2023 में ऐसा मामला सामने आया था. सतना के तत्कालीन कलेक्टर अनुराग वर्मा और सतना के नगर आयुक्त राजेश शाही की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी. इन तस्वीरों में ये दोनों अधिकारी संघ के सतना में हुए एक प्रशिक्षण शिविर के समापन के मौके पर बीजेपी नेताओं के साथ प्रार्थना में भाग लेते हुए दिखाई दिए थे.

शासकीय अधिकारियों के शाखा जाने पर लगा बैन

सरकारी अधिकारियों के आरएसएस की शाखा में जाने पर 1981 में प्रतिबंध लगाया गया था, तब कांग्रेस की सरकार थी और अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री थे. उसके बाद फिर 2000 में दिग्विजय सिंह सरकार में ये पाबंदी लगाई गई कि राज्य सरकार के कर्मचारी अधिकारी अगर आरएसएस की गतिविधियों में भाग लेते हैं तो इसे राज्य सिविल सेवा नियम 1965 का उल्लंघन माना जाएगा.

2003 में बीजेपी सत्ता में आई तो 2006 में शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री बनने के बाद आरएसएस की गतिविधियों में कर्मचारियों के भाग लेने पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था. 2018 में कांग्रेस ने घोषणा पत्र में कहा कि आरएसएस की शाखाओं की सरकारी परिसर में अनुमति नहीं होगी. ना ही अधिकारी कर्मचारी इसमें भाग ले सकेंगे. हांलाकि फिर 2020 में कमलनाथ सरकार भी गिर गई.