सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: हीरापुर बनेगा तीर्थ स्थल, राजा हिरदेशाह लोधी की गाथा अब पाठ्यक्रम में शामिल

राजा हिरदेशाह लोधी की याद में भोपाल में शौर्य दिवस का आयोजन किया गया था. इसमें सीएम मोहन यादव ने कहा कि राजा हिरदेशाह के बारे में छात्रों को पढ़ाया जाएगा. इसके लिए उनकी जीवनयात्रा को स्कूली सिलेबस में शामिल भी किया जाएगा.

सीएम मोहन यादव का बड़ा ऐलान: हीरापुर बनेगा तीर्थ स्थल, राजा हिरदेशाह लोधी की गाथा अब पाठ्यक्रम में शामिल

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा हिरदेशाह लोधी की जीवनगाथा अब स्कूलों के सिलेबस में शामिल की जाएगी और उनके नाम पर तीर्थ स्थल भी विकसित किया जाएगा। यह घोषणा भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित शौर्य दिवस कार्यक्रम के दौरान की गई। नर्मदा तट के राजा हिरदेशाह के नाम पर हीरापुर तीर्थ स्थल बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा हिरदेशाह लोधी की जीवनगाथा अब स्कूलों के सिलेबस में शामिल की जाएगी। साथ ही उनके नाम पर तीर्थ स्थल विकसित करने की भी योजना है। सीएम ने यह घोषणा मंगलवार को भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित राजा हिरदेशाह की 168वीं पुण्यतिथि (शौर्य दिवस) कार्यक्रम के दौरान की। उन्होंने कहा कि राजा हिरदेशाह का जीवन संघर्ष, साहस और देशभक्ति का प्रतीक है, जिसे नई पीढ़ी को जानना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि नर्मदा तट के हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम पर एक तीर्थ स्थल बनाया जाएगा। साथ ही उनके जीवन और संघर्ष पर शोध कराकर शिक्षा विभाग में इसे पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। नर्मदा टाइगर के नाम से पहचान रखने वाले राजा हिरदेशाह ने अंग्रेज शासन के खिलाफ 1842 में संघर्ष का संकल्प लिया। वे अपने भाइयों के साथ 1858 तक संघर्ष करते रहे। 

CM ने किया बड़ा ऐलान

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राजा हिरदेशाह ने बुंलेदखंड के बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट करके अंग्रेजों के सामने आंदोलन शुरू किया था. राज्य सरकार उनके संघर्ष पर शोध कराएगी. उनके जीवन के अहम घटनाक्रम को शिक्षा विभाग में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा. नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा. इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ फिर से खुलने चाहिए. महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी शोध संस्थान बनाया गया है.

कौन थे राजा हिरदेशाह लोधी?

राजा हिरदेशाह लोधी भारत के एक वीर शासक और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानी और गोंडवाना क्षेत्र के एक प्रभावशाली शासक थे और उन्होंने 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया. उनका सबसे बड़ा योगदान 1842 के बुंदेला-गोंड विद्रोह में माना जाता है, जिसमें उन्होंने अंग्रेजों की नीतियों और अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई. वह न्याय प्रिय और जनता के हित के बारे में सोचने वाले राजा थे. बाद में भले ही उन्हें अंग्रेजों द्वारा पकड़ लिया गया हो और उनके विद्रोह को कुचल दिया गया हो, लेकिन उनका साहस और बलिदान इतिहास में दर्ज हो गया. राजा हिरदेशाह ने 1842 से 1858 तक लगातार ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा और उन्हें नर्मदा टाइगर के नाम से भी जाना जाता है.