ओमान के साथ हुए नए FTA (CEPA) को CAIT ने बताया गेम-चेंजर; कनाडा और इजरायल समझौतों में तेज़ी की मांग :चम्पालाल बोथरा

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने भारत के टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्यात को नई गति देने के लिए उभरते अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों पर फोकस करने की आवश्यकता बताई है। CAIT के अनुसार अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे पारंपरिक बाज़ारों पर अत्यधिक निर्भरता से निर्यात पर 4–5 अरब डॉलर तक का दबाव पड़ रहा है।

ओमान के साथ हुए नए FTA (CEPA) को CAIT ने बताया गेम-चेंजर; कनाडा और इजरायल समझौतों में तेज़ी की मांग :चम्पालाल बोथरा

नए उभरते बाज़ारों पर फोकस से भारत के टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्यात को मिलेगी नई गति: CAIT

सूरत,कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने भारत के टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्यात को नई दिशा देने हेतु केंद्र सरकार से नीतिगत सहयोग और रणनीतिक हस्तक्षेप की मांग की है। CAIT ने कहा है कि बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में अब पारंपरिक निर्यात बाज़ारों पर निर्भरता कम कर नए उभरते अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों पर केंद्रित निर्यात रणनीति अपनाना अनिवार्य हो गया है।
CAIT के अनुसार वर्तमान में भारतीय टेक्सटाइल निर्यात अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे सीमित बाज़ारों पर अत्यधिक निर्भर है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण इस निर्भरता से लगभग 4–5 अरब डॉलर तक का वार्षिक दबाव देखने को मिल रहा है। इसका प्रभावी समाधान ओमान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और मॉरीशस जैसे देशों के साथ हुए हालिया व्यापार समझौतों का समुचित लाभ उठाना तथा नए बाज़ारों की सक्रिय खोज करना है।
CAIT  की टेक्सटाइल & गारमेंट कमेटी  के राष्ट्रीय चेयरमैन चम्पालाल बोथरा ने बताया कि मध्य पूर्व, अफ्रीका, पूर्वी यूरोप, पूर्वी एशिया और लैटिन अमेरिका में लगभग 40 नए संभावित निर्यात बाज़ार उभर रहे हैं। इसी कड़ी में 18 दिसंबर 2025 को भारत और ओमान के बीच हस्ताक्षरित ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता’ (CEPA) एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा, जिसके अंतर्गत भारतीय टेक्सटाइल एवं गारमेंट उत्पादों को ओमान में शून्य आयात शुल्क (Zero Duty) का लाभ प्राप्त होगा।
CAIT ने सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए निम्न बिंदुओं को रेखांकित किया—
• ओमान: समझौता संपन्न, जिससे भारतीय टेक्सटाइल को खाड़ी देशों में एक मजबूत गेटवे मिलेगा।
• कनाडा: व्यापार वार्ता पुनः आरंभ हो चुकी है। CAIT ने इसे शीघ्र अंतिम रूप देने की मांग की है ताकि उत्तरी अमेरिका में भारत की उपस्थिति और मजबूत हो सके।
• इजरायल: दोनों देश दो-चरणीय (Two-Phase) FTA पर विचार कर रहे हैं। CAIT ने पहले चरण में टेक्सटाइल एवं गारमेंट जैसे लो-हैंगिंग फ्रूट्स को शामिल करने की मांग की है।
• ब्रिटेन (UK) एवं EFTA: ब्रिटेन के साथ समझौता साइन हो चुका है तथा EFTA (स्विट्ज़रलैंड, नॉर्वे आदि) के साथ व्यापार प्रारंभ हो चुका है। इन समझौतों का वास्तविक लाभ ज़मीनी स्तर तक निर्यातकों को मिलना आवश्यक है।
• ⁠कैट की टेक्सटाइल &  गारमेंट कमेटी  ने  सरकार को सौंपे गए प्रमुख नीतिगत सुझाव
 1. मार्केट-स्पेसिफिक मिशन: नए उभरते बाज़ारों के लिए विशेष एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन शुरू किए जाएं।
 2. टैरिफ रणनीति: ओमान, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे समझौतों के अनुरूप उत्पाद-विशेष निर्यात रणनीति तैयार की जाए।
 3. सतत उत्पादन (Sustainability): ऑर्गेनिक कॉटन, रीसायकल फाइबर एवं ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाए।
 4. MSME सहायता: डिजिटल सैंपलिंग, लीन मैन्युफैक्चरिंग एवं फैक्ट्री-टू-स्टोर मॉडल हेतु वित्तीय सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
 5. लॉजिस्टिक्स सुधार: बंदरगाहों, कंटेनर उपलब्धता एवं मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत कर लीड-टाइम घटाया जाए।
CAIT के राष्ट्रीय चेयरमैन  चम्पालाल बोथरा ने कहा,
“भारत के टेक्सटाइल एवं गारमेंट निर्यात का भविष्य नए उभरते बाज़ारों में निहित है। यदि ओमान और ऑस्ट्रेलिया जैसे समझौतों का सही क्रियान्वयन किया जाए और कनाडा व इजरायल के साथ FTA वार्ताओं को तेज़ी दी जाए, तो भारत वैश्विक टेक्सटाइल वैल्यू-चेन में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकता है।”
बोथरा ने यह भी स्पष्ट किया कि FOSTTA/CAIT पिछले 6–7 वर्षों से लगातार FTA की मांग करता आ रहा है, और अब सरकार द्वारा इस दिशा में लाई गई तेज़ी कपड़ा बाज़ार के लिए निर्यात के नए द्वार खोलेगी, जिससे MSME और ट्रेडर्स को सीधा लाभ मिलेगा।