मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलों के बीच PM मोदी और नड्डा से मिले CM योगी,सजेगी 2027 की रणनीति, संगठन-सरकार में साधे जाएंगे जातीय समीकरण
उत्तर प्रदेश में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से पहले हुई इस बैठक को सियासी तौर पर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार योगी कैबिनेट के संभावित विस्तार में जातीय, क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधा जाएगा. अभी 6 स्थान खाली हैं. कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाने की भी बात है.
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में बीते एक पखवाड़े से कई मुद्दे गरमाए रहे. यूपी में भाजपा के नए अध्यक्ष की ताजपोशी के बाद ब्राह्मण विधायकों की बैठक ने सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंचा दिया था. कैबिनेट विस्तार की भी सुगबुगाहट हो रही है. अब सीएम योगी और यूपी के दोनों डिप्टी सीएम दिल्ली पहुंचे हैं. इन तीनों दिग्गजों के दिल्ली पहुंचने के बाद से उत्तर प्रदेश की सियासत फिर उफान मारने लगी है. सीएम योगी के अचानक दिल्ली पहुंचने को केवल एक औपचारिक दौरा नहीं माना जा रहा. उनके इस दौरे ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में चर्चाओं को तेज कर दी है. माना जा रहा है कि यह दौरा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति की दिशा और दशा तय कर सकता है.
मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें क्यों तेज हुईं
दरअसल यूपी में लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा चल रही है. मौजूदा योगी कैबिनेट में अभी भी कई पद खाली हैं. प्रदेश अध्यक्ष पद पर पंकज चौधरी की नियुक्ति पहले ही हो चुकी है. इसके बाद से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी की योगी कैबिनेट में वापसी हो सकती है. साथ ही यह भी माना जा रहा है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है या उनके विभाग बदले जा सकते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात क्यों है खास
सूत्रों की मानें तो सीए योगी यूपी भवन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए रवाना हुए. दोनों नेताओं के बीच एक घंटे से भी ज्यादा वक्त तक बातचीत चली. इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है. माना जा रहा है कि सीएम योगी, प्रधानमंत्री को उत्तर प्रदेश में चल रही बड़ी विकास योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट सौंप सकते हैं. नए साल में कई अहम परियोजनाएं पूरी होने जा रही हैं. उनके उद्घाटन और टाइमलाइन को लेकर भी चर्चा संभव है.
संगठन और सरकार के बीच तालमेल की कवायद
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद सीएमम योगी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की. इन बैठकों का मकसद केवल औपचारिक नहीं बल्कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल बनाना भी माना जा रहा है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संगठनात्मक ढांचे में बदलाव पर भी चर्चा हो सकती है.
दोनों डिप्टी सीएम की मौजूदगी ने बढ़ाया सस्पेंस
इस पूरे सियासी घटनाक्रम को और दिलचस्प बनाता है यूपी के दोनों उपमुख्यमंत्रियों का दिल्ली में मौजूद होना. केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक पहले से ही राजधानी में हैं. सोमवार की सुबह ब्रजेश पाठक की नितिन नवीन से मुलाकात भी हो चुकी है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि क्या इन बैठकों में मंत्रिमंडल विस्तार और विभागों के बंटवारे पर चर्चा हो रही है.
जातीय और क्षेत्रीय संतुलन की तैयारी?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर मंत्रिमंडल विस्तार होता है तो इसमें जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर खास ध्यान दिया जाएगा. पश्चिम यूपी, पूर्वांचल, बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र से नए चेहरों को मौका मिल सकता है. इसके अलावा संगठन में सक्रिय नेताओं को सरकार में जिम्मेदारी देने का फार्मूला भी अपनाया जा सकता है
खरमास के बाद क्यों बढ़ी हलचल
खरमास खत्म होने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े फैसलों की संभावना पहले से जताई जा रही थी. ऐसे समय में सीएम योगी का दिल्ली दौरा इस ओर इशारा करता है कि जल्द ही बड़े राजनीतिक फैसले लिए जा सकते हैं. भले ही आधिकारिक तौर पर इन बैठकों को शिष्टाचार मुलाकात बताया जा रहा हो लेकिन सियासी संकेत कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं.
मिशन 2027 पर साफ फोकस
इन सभी बैठकों का सबसे बड़ा एजेंडा माना जा रहा है ‘मिशन 2027’. भाजपा किसी भी हाल में उत्तर प्रदेश की सत्ता दोबारा अपने पास बनाए रखना चाहती है. इसके लिए सरकार के कामकाज, संगठन की मजबूती और जनता के बीच भरोसे को और मजबूत करने की रणनीति पर काम हो रहा है. सीएम योगी का दिल्ली दौरा इसी रणनीति की एक अहम कड़ी माना जा रहा है.
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस