प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 12 वर्ष : सेवा, सुशासन और विकास का स्वर्णिम काल-गोविंद सिंह राजपूत
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में बीते 12 वर्षों को सेवा, सुशासन और विकास का स्वर्णिम काल बताया है। उन्होंने कहा कि इस दौरान देश में पारदर्शी शासन, डिजिटल सशक्तिकरण, आर्थिक सुधार, जनकल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। डीबीटी, जीएसटी, डिजिटल इंडिया, यूपीआई, जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहलें आम लोगों तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित हुईं।
डिजिटल क्रांति, जनकल्याणकारी योजनाओं, आर्थिक सुधारों और वैश्विक प्रतिष्ठा के विस्तार को बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पिछले 12 वर्ष अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण रहे हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री के रूप में श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रारंभ हुई विकास यात्रा ने देश के सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी तथा वैश्विक स्वरूप में व्यापक परिवर्तन लाने का प्रयास किया है। इस अवधि में सुशासन, जनकल्याण, आत्मनिर्भरता, डिजिटल सशक्तिकरण और वैश्विक प्रतिष्ठा को केंद्र में रखकर अनेक नीतियाँ एवं कार्यक्रम लागू किए गए, जिनका प्रभाव देश के विभिन्न वर्गों तक पहुँचा है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और तकनीक-आधारित बनाने पर विशेष बल दिया गया। प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से सरकारी योजनाओं के लाभ को सीधे नागरिकों तक पहुँचाने का प्रयास किया गया। प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली के विस्तार ने सरकारी सहायता के वितरण में पारदर्शिता बढ़ाई तथा बिचौलियों की भूमिका को कम किया।
आर्थिक क्षेत्र में सरकार ने संरचनात्मक सुधारों को प्राथमिकता दी। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के माध्यम से देश को एकीकृत कर व्यवस्था प्रदान की गई, जिससे व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने का प्रयास हुआ। निवेश, विनिर्माण और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए मेक इन इंडिया, स्टार्टअप प्रोत्साहन तथा औद्योगिक विकास संबंधी विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए गए। भारत आज विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
डिजिटल क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत डिजिटल सेवाओं का विस्तार, इंटरनेट कनेक्टिविटी में वृद्धि तथा ऑनलाइन शासन प्रणाली को सुदृढ़ किया गया। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (यूपीआई) आधारित भुगतान व्यवस्था ने भारत को डिजिटल लेन-देन के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी देशों में स्थापित किया है। आज डिजिटल तकनीक आम नागरिकों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है।
सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में सरकार ने गरीब, वंचित एवं ग्रामीण वर्गों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएँ संचालित कीं। प्रधानमंत्री जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों नागरिकों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा गया। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना ने महिलाओं को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया, जबकि आयुष्मान भारत ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री आवास योजना तथा स्वच्छ भारत मिशन जैसी योजनाओं ने जीवन स्तर में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
बुनियादी ढाँचे के विकास को भी इस अवधि की प्रमुख उपलब्धियों में गिना जाता है। राष्ट्रीय राजमार्गों, एक्सप्रेसवे, रेलवे आधुनिकीकरण, मेट्रो परियोजनाओं, हवाई अड्डों तथा बंदरगाहों के विस्तार के माध्यम से देश की कनेक्टिविटी को नई गति प्रदान की गई। आधुनिक अवसंरचना को आर्थिक विकास का आधार मानते हुए सरकार ने बड़े पैमाने पर निवेश किया, जिसके परिणामस्वरूप देश की विकास क्षमता में वृद्धि हुई।
विदेश नीति के क्षेत्र में भारत की भूमिका अधिक प्रभावशाली और सक्रिय हुई है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने विभिन्न देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को सुदृढ़ किया तथा वैश्विक मंचों पर अपनी उपस्थिति को मजबूत बनाया। जी-20 शिखर सम्मेलन 2023 की सफल अध्यक्षता ने भारत की कूटनीतिक क्षमता और वैश्विक नेतृत्व की संभावनाओं को नई पहचान प्रदान की।
कोविड-19 महामारी जैसी अभूतपूर्व चुनौती के दौरान भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, टीकाकरण अभियान तथा राहत उपायों के माध्यम से संकट का सामना किया। इसी काल में आत्मनिर्भर भारत अभियान का आह्वान किया गया, जिसका उद्देश्य देश को उत्पादन, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला के क्षेत्रों में अधिक आत्मनिर्भर बनाना था।
राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में भी सरकार ने विशेष ध्यान दिया। सीमा अवसंरचना के विकास, रक्षा आधुनिकीकरण तथा स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए अनेक पहलें की गईं। भारत की सुरक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की गई। निस्संदेह, किसी भी लोकतांत्रिक शासन की तरह इस अवधि में विभिन्न नीतियों और निर्णयों पर बहस तथा आलोचनाएँ भी हुईं। रोजगार, महंगाई, कृषि, सामाजिक समावेशन और आर्थिक असमानता जैसे विषय सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में रहे। लोकतंत्र की यही शक्ति है कि वह उपलब्धियों और चुनौतियों दोनों का निष्पक्ष मूल्यांकन करने का अवसर प्रदान करता है।
समग्र रूप से देखा जाए तो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बीते 12 वर्ष भारत के विकास, सुशासन, डिजिटल परिवर्तन और वैश्विक प्रतिष्ठा के विस्तार के महत्वपूर्ण कालखंड के रूप में स्मरण किए जाएंगे। यह अवधि देश को नई दिशा देने, जनभागीदारी को बढ़ाने और विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर करने के निरंतर प्रयासों का प्रतीक है। भारत आज जिस आत्मविश्वास और वैश्विक पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है, उसमें इन 12 वर्षों की नीतियों, योजनाओं और पहलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
(लेखक खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री हैं।)
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस