बंगाल में EVM विवाद: कैलाश विजयवर्गीय के ‘काला टेप’ आरोप से मचा बवाल, 15 बूथों पर पुनर्मतदान से गरमाई सियासत
पश्चिम बंगाल में 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान के बीच सियासत तेज हो गई है। कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि EVM में ‘कमल’ के बटन पर काला टेप लगाया गया था, जिससे मतदाताओं को भ्रमित किया गया। चुनाव आयोग ने अनियमितताओं की शिकायतों के आधार पर मगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर के बूथों पर दोबारा मतदान कराया। आयोग का कहना है कि फैसला जमीनी रिपोर्ट के आधार पर लिया गया, जबकि भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पर गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं। अब सभी की नजरें चुनाव परिणाम पर टिकी हैं।
बंगाल में पुनर्मतदान पर सियासी संग्राम: EVM पर ‘काला टेप’ के आरोप से गरमाई राजनीति
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बीच पुनर्मतदान को लेकर राजनीतिक माहौल बेहद गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में ‘कमल’ के निशान वाले बटन पर काला टेप चिपकाया गया था, जिससे मतदाताओं को भ्रमित करने की कोशिश की गई। इस बयान के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है और विपक्षी दलों ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रियाएं देना शुरू कर दिया है।
15 बूथों पर पुनर्मतदान, चुनाव आयोग सख्त
निर्वाचन आयोग के निर्देश पर दक्षिण 24 परगना जिले के मगराहाट पश्चिम और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्रों के कुल 15 मतदान केंद्रों पर शनिवार, 2 मई को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक पुनर्मतदान कराया गया। यह फैसला 29 अप्रैल को हुए मतदान के दौरान कथित अनियमितताओं और गड़बड़ियों की शिकायतों के आधार पर लिया गया था। आयोग का कहना है कि उसे निर्वाचन अधिकारियों और पर्यवेक्षकों से ऐसी रिपोर्ट मिली थी, जिनमें मतदान प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई गई थी।
इन 15 बूथों में मगराहाट पश्चिम के 11 और डायमंड हार्बर के 4 मतदान केंद्र शामिल हैं। सुरक्षा के मद्देनजर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई और मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए कड़े इंतजाम किए गए।
विजयवर्गीय का आरोप: ‘दिनभर लगा रहा काला टेप’
भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि मतदान के दौरान EVM में कमल के निशान वाले बटन पर काला टेप चिपका दिया गया था, जो पूरे दिन लगा रहा। उन्होंने कहा कि इस गड़बड़ी की जानकारी दोपहर बाद मिली। उनके मुताबिक, यह एक सुनियोजित प्रयास था, जिससे मतदाताओं को भ्रमित कर वोटिंग पैटर्न को प्रभावित किया जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की अनियमितताएं पहले भी होती रही हैं और इसके पीछे तृणमूल कांग्रेस का हाथ रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस बार चुनाव आयोग और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने पहले के मुकाबले ज्यादा सख्ती दिखाई, जिससे मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा।
‘भयमुक्त मतदान से बदलाव तय’
विजयवर्गीय ने दावा किया कि इस बार मतदाताओं ने बिना डर के वोट डाला है। उन्होंने कहा, “जब लोग भयमुक्त होकर मतदान करते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है।” उनके अनुसार, पश्चिम बंगाल में इस बार बड़ा राजनीतिक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
चुनाव आयोग का रुख: रिपोर्ट के आधार पर निर्णय
वहीं, चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पुनर्मतदान का निर्णय पूरी तरह से जमीनी रिपोर्ट और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। उन्होंने बताया कि फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट मिलने के बाद लिया जाएगा।
आयोग ने यह भी कहा कि मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है, और जहां कहीं भी गड़बड़ी की आशंका होती है, वहां सख्त कदम उठाए जाते हैं।
डायमंड हार्बर में बढ़ा सियासी तापमान
डायमंड हार्बर क्षेत्र पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है, क्योंकि यह अभिषेक बनर्जी का प्रभाव क्षेत्र है। भाजपा ने इस क्षेत्र के कई बूथों पर बड़े पैमाने पर चुनावी गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे, जिसके बाद आयोग ने जांच कर पुनर्मतदान का आदेश दिया।
इस क्षेत्र में पुनर्मतदान के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए और मतदान प्रक्रिया पर विशेष निगरानी रखी गई। प्रशासन का दावा है कि इस बार मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता का फैसला अहम
पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, लेकिन EVM से जुड़ा यह नया विवाद चुनावी माहौल को और अधिक संवेदनशील बना रहा है। भाजपा जहां इसे लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ बता रही है, वहीं सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी करार दे सकता है।
फिलहाल, सभी की नजरें अब मतगणना पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इन तमाम विवादों और पुनर्मतदान के बीच जनता किसे अपना समर्थन देती है। चुनाव परिणाम ही यह तय करेंगे कि इन आरोपों का राजनीतिक असर कितना गहरा पड़ा।
बंगाल में पुनर्मतदान ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर भाजपा ने गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं चुनाव आयोग अपने स्तर पर सख्त कार्रवाई कर निष्पक्ष चुनाव कराने का दावा कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है, खासकर यदि अन्य क्षेत्रों से भी ऐसी शिकायतें सामने आती हैं।
लोकतंत्र में चुनाव सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, और ऐसे में हर छोटी-बड़ी गड़बड़ी का गंभीरता से लिया जाना जरूरी है। अब देखना यह है कि चुनाव आयोग आगे क्या कदम उठाता है और जनता का फैसला किस दिशा में जाता है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस