CM को काले झंडे दिखाना पड़ा भारी: 12वीं का छात्र जेल में, बोर्ड परीक्षा छूटी,परिजन बोले-परीक्षा के गुहार के बाद भी नहीं छोड़ा
शहडोल में मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने के बाद 17 वर्षीय छात्र को वयस्क मानकर जेल भेज दिया गया. जेल में रहने के कारण वह 12वीं बोर्ड की अंग्रेजी परीक्षा नहीं दे सका.
धनपुरी में मुख्यमंत्री के काफिले को काला झंडा दिखाने पर पुलिस कार्रवाई में एक 17 वर्षीय छात्र समेत तीन को जेल भेजा गया। छात्र की देर से रिहाई के कारण वह 12वीं अंग्रेजी परीक्षा नहीं दे सका। कांग्रेस ने लाठीचार्ज और राजनीतिक द्वेष का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी।
धनपुरी में मुख्यमंत्री के काफिले के सामने काला झंडा दिखाने के मामले में कार्रवाई को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस मामले में पुलिस ने तीन लोगों को जेल भेजा था, जिनमें एक 17 वर्षीय नाबालिग छात्र भी शामिल था। हालांकि छात्र को मंगलवार सुबह बुढ़ार उप जेल से रिहा कर दिया गया, लेकिन देर से रिहाई होने के कारण वह अपनी कक्षा 12वीं की अंग्रेजी की परीक्षा नहीं दे सका।
परिजन बोले-परीक्षा के गुहार के बाद भी नहीं छोड़ा
पुलिस ने नाबालिग छात्र को धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर बुढ़ार उप जेल भेजा था। परिजनों का आरोप है कि उन्होंने सोमवार को तहसीलदार से कई बार गुहार लगाई थी कि छात्र की मंगलवार को बोर्ड परीक्षा है, इसके बावजूद उसे जमानत नहीं दी गई। मंगलवार सुबह छात्र को बिना परिजनों को सूचना दिए जेल से छोड़ा गया, जिससे वह समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सका।
कांग्रेस ने विरोध में बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्दोष कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया और राजनीतिक द्वेष के तहत उन्हें जेल भेजा गया। इसी के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी ने मंगलवार को धरना देकर ज्ञापन सौंपा था। कांग्रेस ने घोषणा की है कि शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शहडोल पहुंचेंगे और कलेक्ट्रेट का घेराव कर लाठीचार्ज व गिरफ्तारी के विरोध में बड़ा आंदोलन करेंगे।
पुलिस के अनुसार नाबालिग छात्र को पुलिस ने धारा 151 के तहत गिरफ्तार कर बुढ़ार उप जेल भेज दिया था। करीब तीन दिन बाद मंगलवार सुबह लगभग 7 बजे उसकी रिहाई हुई, लेकिन तब तक परीक्षा केंद्र पहुंचने का समय निकल चुका था। परिजनों का आरोप है कि सोमवार को उन्होंने तहसीलदार के समक्ष कई बार गुहार लगाई थी कि छात्र की मंगलवार को बोर्ड परीक्षा है। इसके बावजूद जमानत नहीं दी गई। इतना ही नहीं, मंगलवार सुबह छात्र को बिना परिजनों को सूचना दिए जेल से छोड़ा गया, जिससे वह समय पर परीक्षा केंद्र नहीं पहुंच सका।
बुधवार को रिहा हुए दो
इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस ने कुल 40 कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई की थी। इनमें से 37 को जमानत दे दी गई थी, जबकि आशू चौधरी, शेख साजिद और एक नाबालिग को जेल भेजा गया था। बुधवार सुबह शेख साजिद उर्फ सन्नी और आशू चौधरी की भी बुढ़ार उप जेल से रिहाई हो गई। इस दौरान कांग्रेस के पूर्व जिला अध्यक्ष आज़ाद बहादुर सिंह, प्रदीप सिंह, सूफियान खान, अभिषेक शुक्ला, राम सिंह, सुजीत सिंह, नवाब खान, अजय सिंह, अरविंद नायक, शेख आबिद, असफिया आलम सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता जेल पहुंचे और दोनों कांग्रेसियों को रिहा कराकर बाहर लाए।
निर्दोष कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज का आरोप
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि निर्दोष कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया गया और राजनीतिक द्वेष के तहत जेल भेजा गया। इसी के विरोध में मंगलवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने धरना देकर ज्ञापन सौंपा था। कांग्रेस ने ऐलान किया है कि शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी शहडोल पहुंचेंगे और कलेक्ट्रेट का घेराव कर लाठीचार्ज व गिरफ्तारी के विरोध में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
कागज आने पर पता लगा नाबालिग था सत्यम चतुर्वेदी
जब सत्यम चतुर्वेदी भी जेल पहुंच गया तो उसके परिजनों ने जमानत के लिए आवेदन लगाया और कहा कि उसकी परीक्षा है, उसे जमानत दे दी जाए. जमानत के लिए जब कागजात आए तो पता लगा कि सत्यम 18 साल का नहीं है, अभी वह नाबालिग है. नियम अनुसार नाबालिग को जेल नहीं भेजा जा सकता, लेकिन पुलिस और तहसीलदार की लापरवाही के कारण नाबालिग को जेल की हवा खानी पड़ी और जेल में बंद रहने के कारण वह अपनी परीक्षा भी नहीं दे पाया.
सत्यम को बिना जमानत दिए जेल से छोड़ दिया गया, लेकिन जब तक वह परीक्षा केंद्र पहुंचा तब तक उसकी परीक्षा शुरू हो चुकी थी और वह परीक्षा नहीं दे पाया. इस पूरे मामले पर शहडोल का प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे हुए हैं और कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है. प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक छात्र के भविष्य पर अब सवालिया निशान लग गए हैं.
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस