पुलिस का सीक्रेट ऑपरेशन: लेडी ड्रग्स माफिया, प्रधान आरक्षक समेत कई लोग हिरासत में, रातभर चला हाई-प्रोफाइल एक्शन
इंदौर कमिश्नोरेट पुलिस ने सोमवार तड़के नशे के खिलाफ 'सीक्रेट' ऑपरेशन चलाया। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच और छह थानों की टीम ने छापे मारे।
इंदौर के रीजनल पार्क में महिलाओं से छेड़छाड़ करने वालों पर राजेंद्र नगर पुलिस ने ‘ऑपरेशन सिक्रेट मिडनाइट’ चलाया। सादी वर्दी में तैनात महिला पुलिसकर्मियों पर कमेंट पास करते ही दो मनचलों को मौके से पकड़ लिया गया। पुलिस ने दोनों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में कमिश्नरेट पुलिस ने सोमवार तड़के एक बड़े और गोपनीय ऑपरेशन को अंजाम देते हुए शहर में सक्रिय बताए जा रहे आपराधिक और ड्रग्स नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की। इस ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच के साथ छह थानों की संयुक्त टीमों ने देर रात से लेकर सुबह तक कई स्थानों पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर ड्रग्स और अवैध कारोबार से जुड़ी एक महिला माफिया, उसके बेटे और एक प्रधान आरक्षक सहित कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी स्वयं संतोष कुमार सिंह कर रहे थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन को बेहद गोपनीय रखा गया था और इसमें शामिल अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि कार्रवाई से जुड़ी कोई भी जानकारी बाहर साझा नहीं की जाए।
छह थानों की टीम और क्राइम ब्रांच ने संभाला मोर्चा
जानकारी के अनुसार ऑपरेशन में क्राइम ब्रांच के साथ शहर के छह थानों की पुलिस टीमों को शामिल किया गया था। पुलिस का उद्देश्य शहर में सक्रिय बताए जा रहे ड्रग्स नेटवर्क और उससे जुड़े आर्थिक एवं आपराधिक तंत्र तक पहुंचना था।
सूत्रों के मुताबिक कार्रवाई की शुरुआत द्वारकापुरी थाना क्षेत्र से हुई। सबसे पहले क्राइम ब्रांच ने द्वारकापुरी इलाके में रहने वाली अलका दीक्षित को हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि उसे सीधे सार्वजनिक स्थान पर पूछताछ के बजाय एक गुप्त स्थान पर ले जाया गया, जहां उससे नेटवर्क और उसके संपर्कों को लेकर पूछताछ शुरू की गई।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अलका से मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई को दिशा दी गई और इसके बाद ऑपरेशन का दायरा तेजी से बढ़ाया गया।
बेटे जयदीप को अहिरखेड़ी से लिया हिरासत में
अलका दीक्षित से पूछताछ के बाद दूसरी टीम को तत्काल अलर्ट किया गया। इसके बाद पुलिस ने उसके बेटे जयदीप को अहिरखेड़ी क्षेत्र से हिरासत में लिया।
सूत्रों का कहना है कि जयदीप से पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद पुलिस ने अन्य संदिग्ध ठिकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित नेटवर्क में उसकी क्या भूमिका थी और वह किन लोगों के संपर्क में था।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जयदीप का नाम पहले भी आपराधिक मामलों में सामने आ चुका है। कुछ समय पहले उसे द्वारकापुरी पुलिस ने जानलेवा हमले के एक मामले में गिरफ्तार किया था। ऐसे में जांच एजेंसियां उसके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और वर्तमान गतिविधियों के बीच भी संबंध तलाश रही हैं।
प्रधान आरक्षक के घर पर छापा, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त
ऑपरेशन के दौरान सबसे चर्चित कार्रवाई एक प्रधान आरक्षक के घर पर हुई। जानकारी के अनुसार एमजी रोड थाना प्रभारी विजय सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में पुलिस टीम ने प्रधान आरक्षक विनोद के घर पर छापेमारी की।
बताया जा रहा है कि विनोद लंबे समय तक क्राइम ब्रांच में पदस्थ रह चुका है और वर्तमान में इंटेलिजेंस शाखा में तैनात है। पुलिस को संदेह है कि उसका भी इस कथित नेटवर्क से संबंध हो सकता है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उसके घर से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की। जानकारी के अनुसार उसके बेटे का लैपटॉप और मोबाइल फोन भी जब्त किया गया है, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा सकती है।
छापेमारी के दौरान परिजनों द्वारा विरोध किए जाने की भी जानकारी सामने आई है, हालांकि पुलिस ने कार्रवाई जारी रखी।
अलग-अलग स्थानों पर पूछताछ, गोपनीय रखी गई कार्रवाई
पूरे ऑपरेशन को लेकर पुलिस ने अत्यधिक गोपनीयता बरती। हिरासत में लिए गए सभी लोगों से अलग-अलग स्थानों पर पूछताछ की जा रही है ताकि जानकारी लीक न हो और जांच प्रभावित न हो।
कार्रवाई की मॉनिटरिंग पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह और एडिशनल पुलिस कमिश्नर राजेश कुमार सिंह लगातार कर रहे थे। वहीं पूछताछ और जांच की जिम्मेदारी डीसीपी क्राइम राजेश त्रिपाठी को सौंपी गई थी।
सूत्रों के मुताबिक जांच टीमों को स्पष्ट निर्देश थे कि ऑपरेशन की जानकारी सीमित अधिकारियों तक ही रखी जाए और किसी भी स्तर पर सूचनाएं सार्वजनिक न हों।
पीथमपुर तक पहुंची जांच
पुलिस सूत्रों के अनुसार कार्रवाई सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं रही। देर रात एक विशेष टीम को पीथमपुर भी भेजा गया, जहां कथित ड्रग्स कारोबार से जुड़े कुछ और लोगों को हिरासत में लिया गया।
इन लोगों से पूछताछ के लिए खजराना थाना परिसर में विशेष व्यवस्था की गई। माना जा रहा है कि पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने और इसके आर्थिक स्रोतों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित था या इसके तार अन्य जिलों और शहरों से भी जुड़े हुए हैं।
अवैध शराब कारोबार से ड्रग्स नेटवर्क तक पहुंची अलका?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अहिरखेड़ी निवासी अलका दीक्षित लंबे समय से अवैध शराब कारोबार से जुड़ी रही है। स्थानीय स्तर पर उसका प्रभाव काफी मजबूत बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार कई थाना प्रभारी बदलने के बावजूद उसका कथित नेटवर्क सक्रिय बना रहा। पुलिस का दावा है कि अवैध शराब कारोबार की आड़ में उसने अन्य गैरकानूनी गतिविधियों और ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क में भी अपनी पहुंच बनाई।
सूत्रों का कहना है कि उसका बेटा जयदीप भी कथित रूप से इस कारोबार में उसकी मदद करता था।
हालांकि पुलिस ने अभी तक आधिकारिक रूप से पूरे नेटवर्क का खुलासा नहीं किया है, लेकिन जांच के दायरे को लगातार बढ़ाया जा रहा है।
आगे हो सकते हैं बड़े खुलासे
पुलिस फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर रही है और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप और संपर्कों की पड़ताल के आधार पर आगे और कार्रवाई संभव मानी जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और नाम सामने आ सकते हैं। जांच एजेंसियां नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों, संपर्कों और कथित संरक्षण तंत्र की भी पड़ताल कर रही हैं।
इंदौर पुलिस का यह ऑपरेशन हाल के समय की सबसे बड़ी गोपनीय कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है, जिसने शहर में सक्रिय बताए जा रहे ड्रग्स और अवैध कारोबार के नेटवर्क को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पूरे मामले पर पुलिस की विस्तृत आधिकारिक रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस