सतना में HIV संक्रमण मामले में एक्शन , ब्लड बैंक प्रभारी डॉक्टर समेत तीन लोगों पर गिरी गाज,6 बच्चे पॉजिटिव

मध्य प्रदेश के सतना ज़िला अस्पताल में थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने का मामला सामने आया है. इस संबंध में कार्रवाई करते हुए अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी और दो लैब टेकनीशियन निलंबित किए गए हैं. साथ ही अस्पताल के पास से ज़रूरतमंद मरीज़ों व उनके परिजनोंं को फंसाकर अवैध रूप से रक्त उपलब्ध कराने वाले एक रैकेट का भी खुलासा हुआ है.

सतना में HIV संक्रमण मामले में एक्शन , ब्लड बैंक प्रभारी डॉक्टर समेत तीन लोगों पर गिरी गाज,6 बच्चे  पॉजिटिव

सतना के सरकारी अस्पताल में छह बच्चों के HIV पॉजिटिव पाए जाने के मामले में मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है. ब्लड बैंक प्रभारी डॉक्टर और दो लैब तकनीशियनों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि पूर्व सिविल सर्जन से जवाब तलब किया गया है. जांच रिपोर्ट में संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की आशंका जताई गई है.

भोपाल : इस सप्ताह किसी शुरुआत में मध्य प्रदेश के सतना ज़िला अस्पताल में थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाए जाने का मामला सामने आया है. अब इस संबंध में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा कार्रवाई करते हुए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक प्रभारी और दो लैब टेकनीशियन को निलंबित कर दिया गया है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने गुरुवार (18 दिसंबर) को सतना जिले के सरदार वल्लभभाई पटेल सरकारी अस्पताल में छह बच्चों के एचआईवी पॉजिटिव पाए जाने के संबंध में एक ब्लड बैंक प्रभारी और दो लैब तकनीशियनों को निलंबित कर दिया है.

अधिकारी ने आगे बताया कि सतना में संक्रमित रक्त चढ़ाने के मामले की जांच के लिए गठित समिति की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है.

उल्लेखनीय है कि राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 16 दिसंबर को इस समिति का गठन किया गया था.

अधिकारी के अनुसार, समिति की रिपोर्ट के आधार पर ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल और प्रयोगशाला तकनीशियन राम भाई त्रिपाठी और नंदलाल पांडे को निलंबित कर दिया गया है.

इस संबंध में जिला अस्पताल के पूर्व सिविल सर्जन मनोज शुक्ला को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उन्हें लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है.

इस के साथ सिविल सर्जन को चेतावनी दी गई है कि यदि उनका स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं रहा तो उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

गौरतलब है कि 16 दिसंबर को मीडिया में यह खबर सामने आई थी कि सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित छह बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के बाद यह लाइलाज बीमारी हो गई. इनमें से एक बच्चे के माता-पिता भी प्रभावित हुए हैं.

ये सभी मामले जनवरी से मई के बीच हैं और सभी का इलाज एचआईवी प्रोटोकॉल के अनुसार किया जा रहा है.

सतना जिला अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित 5 बच्चे ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए आए हुए थे. लेकिन, सिस्टम की अनदेखी के चलते यहां बच्चों को चढ़ाया जाने वाला ब्लड बिना जांच के ही ट्रांसफ्यूज कर दिया. बाद में जांच करने पर चढ़ाए गए ब्लड के एचआईवी संक्रमित होने की जानकारी सामने आई.

करीब 9 महीने पहले ही बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे. लेकिन जिला अस्पताल ने और जिला प्रशासन ने इसकी भनक नहीं लगने दी. हालांकि बच्चों की तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर इसका खुलासा हो गया.

 गुरुवार को एसडीएम सिटी राहुल सिलड़िया ने पुलिस की मदद से ऐसे कुछ लोगों को पकड़ा, जो अस्पताल के बाहर 4500 रुपये लेकर खून उपलब्ध कराने का दावा कर रहे थे और काफी समय से जिला अस्पताल परिसर में सक्रिय थे.

ये लोग जिला अस्पताल के सामने चाय की दुकान में बैठकर जरूरतमंद मरीजों व उनके परिजनोंं को अपने जाल में फंसाकर अवैध रूप से रक्त उपलब्ध कराने का धंधा कर रहे थे.

कार्रवाई के दौरान इन लोगों से नकद रकम बरामद की गई है. फिलहाल तीनों दलालों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे पूछताछ की जा रही है.

इससे पहले झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम ज़िले के सरकारी सदर अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने का मामला सामने आया था.

तब चाईबासा के सिविल सर्जन, एचआईवी यूनिट के प्रभारी चिकित्सक और संबंधित टेक्नीशियन को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था.

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पीड़ित बच्चों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की थी. साथ ही सभी बच्चों के इलाज का पूरा खर्च उठाने की भी बात कही थी.