प्रदेशभर के वकील हड़ताल पर: एडवोकेट की हत्या के विरोध में उबाल, 3000 मामलों की सुनवाई प्रभावित; एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट की मांग तेज
शिवपुरी के करैरा में वकील की हत्या के विरोध में पूरे मध्यप्रदेश के वकील सोमवार (16 फरवरी) को काम से विरत, यानी हड़ताल पर रहेंगे। वे कोर्ट तो जाएंगे, लेकिन काम नहीं करेंगे। शिवपुरी में कोर्ट जाते समय दिनदहाड़े अधिवक्ता की हत्या से वकीलों में काफी आक्रोश है।
मध्य प्रदेश में एडवोकेट आज शिवपुरी में वकील की हत्या के विरोध में आज काम नहीं करेंगे. वकीलों की हड़ताल से 3000 मुकदमों पर असर पड़ेगा.
शिवपुरी। मध्य प्रदेश में वरिष्ठ अधिवक्ता की दिनदहाड़े हत्या के बाद वकील समुदाय में भारी आक्रोश फैल गया है। शिवपुरी जिले के करैरा में 14 फरवरी को अधिवक्ता संजय कुमार सक्सेना (57) की गोली मारकर हत्या किए जाने के विरोध में सोमवार को प्रदेशभर के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से पूरी तरह दूर रहेंगे। इस दौरान वकील कोर्ट परिसरों में मौजूद रहेंगे लेकिन किसी भी मामले की पैरवी या सुनवाई में हिस्सा नहीं लेंगे। इसकी वजह से राज्यभर की अदालतों का कामकाज प्रभावित रहेगा और हजारों मामलों की सुनवाई टलने की संभावना है।
मध्य प्रदेश स्टेट बार काउंसिल की आपात बैठक में सर्वसम्मति से प्रतिवाद दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है। प्रदेश की विभिन्न जिला और तहसील बार एसोसिएशनों ने भी इस हड़ताल को समर्थन दिया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि लगातार बढ़ रही हिंसक घटनाओं के बीच वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
घटना 14 फरवरी की सुबह की बताई जा रही है। अधिवक्ता संजय सक्सेना रोज की तरह बाइक से करैरा सिविल कोर्ट जा रहे थे। इसी दौरान सागर ताल के पास पहले से घात लगाए बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। दिनदहाड़े हुई इस वारदात से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।
परिजनों ने हत्या के पीछे जमीन विवाद को मुख्य कारण बताया है। उनका आरोप है कि हाल ही में एक मामले में अधिवक्ता सक्सेना ने एक पक्ष को केस जितवाया था। जिसके बाद विरोधी पक्ष ने सुपारी देकर उनकी हत्या करवाई। परिवार ने चार लोगों के नाम पुलिस को दिए हैं। इनमें शिक्षक कमलेश शर्मा और उनके सरपंच चाचा सुनील शर्मा सहित अन्य लोग शामिल हैं। जांच के दौरान पुलिस के सामने सुपारी किलिंग का एंगल भी सामने आया है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हत्या के लिए करीब 10 लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी जिसमें से 2 लाख रुपये एडवांस दिए जाने की बात सामने आई है। पुलिस चुनावी रंजिश की संभावना को भी जांच में शामिल कर रही है।
पुलिस ने मामले में तेजी दिखाते हुए रविवार को शॉर्ट एनकाउंटर के बाद तीन शूटरों को गिरफ्तार किया है। अब तक कुल पांच लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है और उनसे पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे षड्यंत्र की कड़ियां जोड़कर जल्द ही मामले का खुलासा किया जाएगा।
घटना के विरोध में अधिवक्ता संगठन मृतक के परिवार के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी, सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और कड़ी सजा तथा अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट को तत्काल लागू करने की मांग कर रहे हैं। इन मांगों को लेकर वकील सोमवार को कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कार्रवाई नहीं की तो सात दिनों के भीतर राजधानी भोपाल में बड़ा घेराव और व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस घटना ने कानून व्यवस्था और अधिवक्ताओं की सुरक्षा को लेकर प्रदेशभर में गंभीर बहस छेड़ दी है।
एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट पर निर्णायक संघर्ष
स्टेट बार काउंसिल के चेयरमैन राधेलाल गुप्ता और वाइस चेयरमैन आरके सिंह सैनी ने स्पष्ट किया है कि अब एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू कराने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। काउंसिल ने राज्य सरकार को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेश के करीब सवा लाख वकील भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे। बैठक के अंत में दिवंगत अधिवक्ता को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मुआवजा और नौकरी की मांग
बार संगठनों ने मृतक के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, एक आश्रित को सरकारी नौकरी, आरोपितों पर कठोर कार्रवाई और एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट के शीघ्र क्रियान्वयन की मांग की है। तीनों बार एसोसिएशनों ने प्रतिवाद दिवस की सूचना हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजते हुए अनुरोध किया है कि वकीलों की गैरहाजिरी में मामलों को निरस्त न किया जाए। सोमवार दोपहर 12:30 बजे मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा।
बार पदाधिकारियों का कहना है कि अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने की मांग वर्षों से लंबित है। पूर्व में आश्वासन मिले, लेकिन अब तक ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं।
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस