दिग्विजय सिंह का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: NEET पेपर लीक को बताया “खुलेआम व्यापार”, शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग,ग्वालियर में पूर्व मुख्यमंत्री का बयान, परीक्षा प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ग्वालियर दौरे पर पहुंचे. जहां उन्होंने नीट पेपर लीक समेत कई मुद्दों पर सरकार पर जमकर निशाना साधा.

दिग्विजय सिंह का केंद्र सरकार पर तीखा हमला: NEET पेपर लीक को बताया “खुलेआम व्यापार”, शिक्षा मंत्री से इस्तीफे की मांग,ग्वालियर में पूर्व मुख्यमंत्री का बयान, परीक्षा प्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

ग्वालियर दौरे में दिग्विजय सिंह का केंद्र सरकार पर हमला

NEET पेपर लीक को बताया “खुलेआम व्यापार”

 22 लाख छात्रों के भविष्य पर संकट का दावा

 शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने रविवार को ग्वालियर दौरे के दौरान केंद्र सरकार और शिक्षा व्यवस्था को लेकर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने विशेष रूप से NEET (National Eligibility cum Entrance Test) में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और धांधली के मामलों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा, जो देशभर के लाखों मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़ी है, अब “व्यापार का रूप ले चुकी है।” उन्होंने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली में लगातार खामियां सामने आने के बावजूद सरकार ठोस कदम नहीं उठा रही है।

“22 लाख छात्रों का भविष्य खतरे में” — दिग्विजय सिंह

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बार-बार पेपर लीक और गड़बड़ियों के कारण लगभग 22 लाख छात्र-छात्राओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों को बार-बार परीक्षाओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनका मानसिक तनाव और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कई भाजपा शासित राज्यों से भी परीक्षा गड़बड़ियों की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं, लेकिन इसके बावजूद कोई प्रभावी सुधार नहीं किया गया।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह स्थिति देश की शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है और इससे युवाओं का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।

शिक्षा मंत्री पर सीधा हमला, इस्तीफे की मांग

कांग्रेस नेता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने मांग की कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।

दिग्विजय सिंह ने कहा कि यदि मंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो प्रधानमंत्री को उन्हें पद से हटाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परीक्षा सुधार और पारदर्शिता को लेकर कई सुझावों को नजरअंदाज किया है।

“स्टैंडिंग कमेटी के सुझावों की अनदेखी लोकतंत्र का अपमान”

दिग्विजय सिंह ने संसद की स्टैंडिंग कमेटी के कामकाज का उल्लेख करते हुए कहा कि समिति द्वारा दिए गए सुझावों को सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि जब पत्रकारों ने इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री से सवाल किया, तो मंत्री ने कहा कि समिति में विपक्ष के लोग भी शामिल थे, इसलिए सुझावों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बयान को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि संसदीय समितियों में सभी दलों के सांसद मिलकर रिपोर्ट तैयार करते हैं और उनके सुझाव देशहित में होते हैं।

परीक्षा सुधार पर रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई नहीं

दिग्विजय सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए समिति द्वारा विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई थी, लेकिन सरकार ने उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुधार लागू किए गए होते तो बार-बार होने वाली धांधलियों को रोका जा सकता था। उन्होंने इसे “युवाओं के भविष्य के साथ धोखा” बताया।

NTA पर भी निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री ने NTA (National Testing Agency) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि NTA के शीर्ष अधिकारियों को तुरंत हटाया जाए और संस्था की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि लगातार हो रही अनियमितताओं से यह स्पष्ट होता है कि परीक्षा संचालन प्रणाली में गंभीर खामियां हैं।

युवाओं के भविष्य पर चिंता

दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में छात्रों के भविष्य को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि देश का युवा वर्ग कठिन मेहनत करता है, लेकिन परीक्षा प्रणाली की खामियों के कारण उनका भविष्य संकट में पड़ जाता है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुए तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कांग्रेस लगातार NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर सरकार पर हमलावर रही है, जबकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।

सरकारी पक्ष का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो रही है।

ग्वालियर में दिए गए इस बयान के साथ एक बार फिर NEET परीक्षा और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। दिग्विजय सिंह ने जहां इसे “खुलेआम व्यापार” करार दिया है, वहीं केंद्र सरकार अब तक इन आरोपों का लगातार खंडन करती रही है।

आने वाले समय में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक मंचों पर और अधिक गरमाने की संभावना है, खासकर तब जब लाखों छात्रों का भविष्य इस परीक्षा प्रणाली से सीधे जुड़ा हुआ है।