घुंघट, बुरका और हिजाब के उपयोग को शासकीय व सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग

संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक किशोर समरिते ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर शासकीय व सार्वजनिक स्थानों पर घूंघट, बुर्का और हिजाब जैसे चेहरे को ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, पहचान सत्यापन और कानून-व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा बताया

घुंघट, बुरका और हिजाब के उपयोग को शासकीय व सार्वजनिक स्थानों पर प्रतिबन्ध लगाने की मांग

मूलचन्द मेधोनिया 

राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक पहचान के नाम पर चेहरे ढकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध की उठी मांग

भोपाल/नई दिल्ली । संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लांझी के पूर्व विधायक किशोर समरिते ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखकर शासकीय एवं सार्वजनिक स्थानों पर घूंघट, बुर्का और हिजाब जैसे चेहरे को ढंकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने इसे सुरक्षा, पहचान और सामाजिक समानता से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

किशोर समरिते ने पत्र में उल्लेख किया कि सार्वजनिक स्थानों, शासकीय कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों, न्यायालयों, अस्पतालों और परिवहन सेवाओं में चेहरा ढका होना सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब देश आंतरिक व बाहरी सुरक्षा खतरों से जूझ रहा है, तब पहचान छुपाने वाले परिधानों पर नियंत्रण आवश्यक हो गया है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि कई बार इन परिधानों के कारण सीसीटीवी कैमरों और अन्य निगरानी प्रणालियों की उपयोगिता कम हो जाती है, जिससे अपराधियों को बच निकलने का अवसर मिलता है। समरिते ने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सार्वजनिक स्थलों पर स्पष्ट पहचान अनिवार्य होनी चाहिए।

पत्र में किशोर समरिते ने सामाजिक दृष्टिकोण से भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि घूंघट, बुर्का और हिजाब जैसी प्रथाएं महिला समानता और स्वतंत्रता के मार्ग में बाधा बन सकती हैं। उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं को बिना किसी दबाव के समान अधिकार और अवसर मिलने चाहिए।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विशेष धर्म या समुदाय को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि यह मांग राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और समान नागरिक नियमों के तहत की गई है। उन्होंने गृह मंत्रालय से अपील की कि इस विषय पर गंभीरता से विचार कर राष्ट्रव्यापी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

किशोर समरिते के इस पत्र के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज होने की संभावना जताई जा रही है।