ब्रह्मकुमारीज ने शिव की शोभा यात्रा में दिया शांति और आत्मजागरण का संदेश, शिवरात्रि बुराइयों को समाप्त करने का पर्व बताया

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर ब्रह्मकुमारीज संस्था द्वारा निकाली गई शिव की भव्य शोभा यात्रा में आध्यात्मिक संदेशों की गूंज सुनाई दी। संस्था की बहनों और भाइयों ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि शिवरात्रि केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्मपरिवर्तन और बुराइयों को समाप्त करने का संकल्प लेने का पर्व है।

ब्रह्मकुमारीज ने शिव की शोभा यात्रा में दिया शांति और आत्मजागरण का संदेश, शिवरात्रि बुराइयों को समाप्त करने का पर्व बताया

उरई में ब्रह्माकुमारीज का शिवरात्रि महोत्सव: शिव ध्वजारोहण के साथ निकली भव्य शोभायात्रा

उरई। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तुलसी नगर स्थित सेवा केंद्र में श्रद्धा और उत्साह के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शिव ध्वजारोहण से हुई। मुख्य अतिथि के रूप में सांसद नारायण दास जी उपस्थित रहे, जिन्होंने ध्वजारोहण कर समारोह का शुभारंभ किया।

इस दौरान परमात्मा का संदेश लिखे गैस गुब्बारों को आसमान में उड़ाया गया, ताकि आध्यात्मिक संदेश जन-जन तक पहुंचे। सांसद नारायण दास जी ने कहा कि शिवरात्रि वास्तव में बुराइयों को समाप्त करने का पावन अवसर है और सभी को अपने जीवन से दुर्गुणों को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए।

शोभायात्रा में झांकियों ने मोहा मन

हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी ब्रह्माकुमारीज द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण द्वादश ज्योतिर्लिंग, लक्ष्मी-नारायण की झांकी, शिव-शंकर की झांकी एवं कलश यात्रा रही। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से भाग लेकर वातावरण को शिवमय बना दिया।

250 से अधिक श्रद्धालु रहे शामिल

शोभायात्रा में अजय एल्ड्रिच स्कूल के प्रतिनिधि, संतोष भाई, गोपाल जी पटेल, रामस्वरूप पाठक, रामगोपाल दीक्षित, सुशील गुप्ता, राजू भाई सहित करीब ढाई सौ लोग शामिल हुए।

आत्मपरिवर्तन का दिव्य संदेश

संस्था की ओर से बताया गया कि परमात्मा का संदेश है— जीवन में भांग, धतूरा और बेल-पत्र के समान निरर्थक तथा दूसरों को दुःख देने वाली बुराइयों को शिव को अर्पण कर अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानें। नर से श्री नारायण और नारी से श्री लक्ष्मी समान गुणों को धारण करने का दिव्य कर्म करें।

‘उपासना’ का अर्थ समझाते हुए कहा गया कि ‘उपा’ अर्थात एक और ‘सना’ अर्थात सानिध्य— यानी एक परमात्मा शिव के सानिध्य में रहने का अभ्यास करना ही सच्ची उपासना है। आज झूठी माया और सांसारिक बंधनों को त्यागकर परमात्मा से जुड़ना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है।

कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि वर्तमान परिवर्तनकाल में समस्त मानवात्माओं को स्वयं और परमात्मा को पहचानकर अपने जीवन में दैवी गुणों का समावेश करना चाहिए। शिवरात्रि आत्मा और परमात्मा शिव के मिलन का पर्व है, जिसे उसके आध्यात्मिक रहस्य को समझकर मनाने में ही इसकी सार्थकता है।