आकृति ग्रीन्स सोसायटी में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर निवासियों ने उठाए सवाल,रखरखाव शुल्क, धार्मिक आयोजनों और कॉर्पस फंड पर आकृति ग्रीन्स के निवासियों की आपत्ति

भोपाल की आकृति ग्रीन्स सोसायटी में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। रहवासियों ने सोसायटी अध्यक्ष दिनेश सिंह पर रखरखाव शुल्क, धार्मिक आयोजनों, कॉर्पस फंड और जीएसटी को लेकर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। खर्चों का उपशीर्ष-वार विवरण न देने, धार्मिक आयोजनों में स्वैच्छिक चंदे से अधिक खर्च रखरखाव निधि से करने और कॉर्पस फंड व उसके ब्याज की जानकारी छिपाने का आरोप है।

आकृति ग्रीन्स सोसायटी में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर निवासियों ने उठाए सवाल,रखरखाव शुल्क, धार्मिक आयोजनों और कॉर्पस फंड पर आकृति ग्रीन्स के निवासियों की आपत्ति

आकृति ग्रीन्स सोसायटी में वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल

रखरखाव शुल्क और फंड उपयोग को लेकर निवासियों की आपत्ति

भोपाल।आकृति ग्रीन्स रहवासी रखरखाव सहकारी संस्था सलैया भोपाल से जुड़े कई निवासियों ने सोसायटी अध्यक्ष दिनेश सिंह की मनमानी, सोसायटी के वित्तीय प्रबंधन, रखरखाव व्यय और संग्रहित निधियों के उपयोग को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। निवासियों का कहना है कि सहकारी समिति अधिनियम और उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत आवश्यक पारदर्शिता का पालन नहीं किया जा रहा है।

सोसायटी के रहवासियों श्रीमती उर्मिला शर्मा, अतुल चतुर्वेदी, डोला चटर्जी, सुरेशचंद्र गुप्ता, ए के सिंह, यमुना सन्नी, योगेश दीवान, राकेश दीवान ने संस्था के अध्यक्ष दिनेश सिंह के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) भोपाल में विस्तृत शिकायत दर्ज कराते हुए कठोर कार्रवाई की मांग की है।
निवासियों के अनुसार आकृति ग्रीन्स परिसर अपने खुले स्थानों, बगीचों और चौड़े मार्गों के कारण एक विशिष्ट आवासीय परिसर है, लेकिन इसकी सामूहिक समृद्धि बनाए रखने के लिए रखरखाव व्यवस्था में पारदर्शिता आवश्यक है।

व्यय विवरण उपलब्ध न होने का आरोप :

निवासियों का कहना है कि रखरखाव शुल्क के अंतर्गत होने वाले खर्चों का उपशीर्ष-वार विवरण बार-बार मांगने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्हें कार्यालय आने को कहा गया, लेकिन वहां भी कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की गई। इसे सहकारी समिति अधिनियम एवं उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत निवासियों के अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।

*स्थिति विवरण पत्र – 31.3.25’ पर आपत्तियां :*

निवासियों ने 31 मार्च 2025 की स्थिति विवरण पत्र (लाभ-हानि विवरण) का हवाला देते हुए कहा कि ‘रखरखाव, विद्युत एवं पानी’ मद में केवल कुल राशि दर्शाई गई है, जबकि पानी, बिजली, सफाई, चौकीदारी, कचरा निपटान आदि उपशीर्षों में कितना खर्च हुआ, इसका कोई विवरण नहीं दिया गया।

धार्मिक आयोजनों के खर्च पर उठाए सवाल :

संचालक मण्डल के सदस्यों और रहवासियों ने यह भी सवाल उठाया कि धार्मिक उत्सवों को स्वैच्छिक योगदान का विषय माना गया है, इसके बावजूद प्राप्त 5,72,553 रुपये के मुकाबले 6,60,860 रुपये खर्च दिखाया गया है। इससे 88,307 रुपये अतिरिक्त खर्च होने की बात सामने आती है, जो कथित रूप से रखरखाव निधि से लिया गया। निवासियों का कहना है कि धार्मिक आयोजन रखरखाव मद में नहीं आते और इनके लिए केवल स्वैच्छिक संग्रह का ही उपयोग होना चाहिए।

धार्मिक व सांस्कृतिक गतिविधियों को अलग रखने का सुझाव :

रहवासियों ने सुझाव दिया है कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को रखरखाव से अलग रखा जाए और इन्हें पूरी तरह स्वैच्छिक, समावेशी और व्यापक स्वरूप दिया जाए, जिसमें बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की शैक्षणिक व विकासात्मक गतिविधियां भी शामिल हों।

सोसायटी के जीएसटी को लेकर विरोधाभास :

7 सितंबर 2025 को आयोजित वार्षिक आम सभा के विवरण में यह उल्लेख किया गया है कि सोसायटी जीएसटी का भुगतान नहीं कर रही है, जबकि मासिक रखरखाव शुल्क बढ़ाने का कारण पहले जीएसटी आवश्यकता बताया गया था। निवासियों का कहना है कि यदि वार्षिक टर्नओवर 20 लाख रुपये से कम है या प्रति फ्लैट मासिक रखरखाव शुल्क 7,500 रुपये से कम है, तो जीएसटी देय नहीं होता। इस संबंध में स्पष्टता की मांग की गई है।

कॉर्पस फंड और ब्याज पर भी गोलमाल की आशंका :

आकृति ग्रीन्स रहवासियों ने बताया कि प्रत्येक फ्लैट से एकत्र किए गए 4,000 रुपये के कॉर्पस फंड, उस पर मिलने वाले ब्याज और उसके उपयोग का कोई स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया। स्थिति विवरण पत्र में बैंक ब्याज के रूप में केवल 45,748 रुपये दर्शाए गए हैं, जिसे कॉर्पस फंड की अनुमानित राशि की तुलना में कम बताया जा रहा है।
निवासियों ने प्रतीकात्मक रूप से इस माह केवल 1,300 रुपये का रखरखाव शुल्क जमा किया है। उनका कहना है कि व्यय का स्पष्ट विवरण, अधिशेष निधि के उपयोग पर निर्णय और जीएसटी स्थिति स्पष्ट होने के बाद वे अपने भुगतान पर पुनर्विचार कर सकते हैं।
निवासियों ने दोहराया कि आकृति ग्रीन्स उनका साझा परिसर है और वे टकराव नहीं बल्कि पारदर्शिता, सहयोग और जवाबदेही चाहते हैं। उनके अनुसार यह व्यक्तिगत नहीं बल्कि पूरे परिसर से जुड़ा सामूहिक और सार्वजनिक मुद्दा है।

न ईओडब्ल्यू की जांच बढ़ी, न जीएसटी अफसरों ने सुना

आकृति ग्रीन्स  के रहवासियों द्वारा सोसायटी अध्यक्ष दिनेश सिंह द्वारा की जा रही आर्थिक अनियमितताओं की 29 अप्रैल 2025 को की गई शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल (ईओडब्ल्यू) ने शिकायत संख्या 1034/25 दर्ज कर लिया था। मगर शिकायत दर्ज करने के 9 महीने बाद भी अभी तक ईओडब्ल्यू की जांच किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।यही हॉल वाणिज्यिक कर के अधिकारियों का है । आकृति ग्रीन्स  के रहवासियों द्वारा जीएसटी कार्यालय में लिखित शिकायत 24 सितंबर को करने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मीडिया द्वारा पूछने पर जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रतिभा नरवरिया पहले तो यह कह कर टालती रही कि इस इंस्पेक्टर को जांच दी है उसकी शादी हो रही है। वह लौट कर आएगा तो जांच होगी और अब शिकायतकर्ताओं से यह कहने लगी है कि जिसको हमने जांच दी थी वो उनका दोस्त है इसलिए जांच नहीं होगी। सवाल यह उठता है कि प्रदेश के उप मुख्यमंत्री एवं वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यकाल में क्या जीएसटी अफसरों की मनमानी इस हद तक बढ़ गई हैं कि उन्हें न सरकार की भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति का भय रह गया और न अपने कर्तव्य का बोध ? क्या जीएसटी अफसर इसी तरह सोसायटियों के सुनियोजित भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का काम करेंगे या पीड़ित जनता को राहत दिलाएंगे।