उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मिला अतिथि विद्वानों का प्रतिनिधिमंडल, अगले माह भोपाल में होगा सम्मेलन; बेहतर नीति और घोषणाओं के संकेत

भोपाल में भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर के नेतृत्व में अतिथि विद्वानों का प्रतिनिधिमंडल उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने अतिथि विद्वानों के भविष्य को सुरक्षित करने, नियमित भर्ती से प्रभावित शिक्षकों के लिए रिक्त पद खोलने और हरियाणा मॉडल जैसी नीति लागू करने की मांग रखी। मंत्री ने अगले माह भोपाल के रविन्द्र भवन में अतिथि विद्वान सम्मेलन आयोजित करने और बेहतर लाभ देने का आश्वासन दिया।

उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मिला अतिथि विद्वानों का प्रतिनिधिमंडल, अगले माह भोपाल में होगा सम्मेलन; बेहतर नीति और घोषणाओं के संकेत

अजय राज केवट माही

प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस भोपाल मध्य प्रदेश

1.उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से मिला अतिथि विद्वानों का प्रतिनिधिमंडल

2. भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में हुई महत्वपूर्ण बैठक

3. भविष्य सुरक्षित करने और नियमितीकरण की मांग उठी

4. हरियाणा मॉडल जैसी नीति लागू करने की मांग

5. नियमित भर्ती से प्रभावित अतिथि विद्वानों का मुद्दा उठा

भोपाल। मध्य प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि विद्वानों के भविष्य को लेकर राज्य सरकार का रुख अब पहले की तुलना में अधिक गंभीर दिखाई दे रहा है। लंबे समय से नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा और स्थायी नीति की मांग कर रहे अतिथि विद्वानों को अब सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिलने लगे हैं। इसी क्रम में बुधवार को अतिथि विद्वानों का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार से उनके श्यामला हिल्स स्थित भोपाल निवास पर मिला और विभिन्न मांगों को लेकर विस्तार से चर्चा की।

प्रतिनिधिमंडल ने अतिथि विद्वानों के भविष्य को सुरक्षित करने, नियमित भर्ती के कारण बाहर हो रहे अतिथि विद्वानों के हितों की रक्षा करने तथा हरियाणा मॉडल की तर्ज पर मध्य प्रदेश में नई नीति लागू करने की मांग रखी। बैठक में मंत्री की ओर से अगले माह भोपाल में अतिथि विद्वान सम्मेलन आयोजित करने तथा भविष्य में बेहतर लाभ देने की दिशा में प्रयास करने का आश्वासन दिया गया।

भारतीय मजदूर संघ के माध्यम से हुई मुलाकात

यह मुलाकात भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर के नेतृत्व में आयोजित हुई। प्रतिनिधिमंडल में डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया, डॉ. देवराज सिंह, डॉ. अजब सिंह राजपूत, डॉ. बीएल दोहरे, डॉ. पूजा मिश्रा, डॉ. आरती दुबे और डॉ. अविनाश मिश्रा सहित कई अतिथि विद्वान शामिल रहे।

प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री के समक्ष बताया कि वर्तमान में नियमित भर्ती प्रक्रिया के चलते बड़ी संख्या में अतिथि विद्वानों के सामने रोजगार और भविष्य को लेकर संकट की स्थिति बन रही है। ऐसे में सरकार को उनकी सेवाओं और वर्षों के अनुभव को ध्यान में रखते हुए ठोस नीति बनानी चाहिए।

हरियाणा मॉडल जैसी नीति लागू करने की मांग

अतिथि विद्वानों ने बैठक में विशेष रूप से हरियाणा राज्य की तर्ज पर नीति लागू करने का मुद्दा उठाया। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि मध्य प्रदेश में भी ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिसमें अतिथि विद्वानों को नियमित कर्मचारियों के समान कुछ सुविधाएं और सेवा सुरक्षा मिल सके।

प्रतिनिधियों ने यह भी मांग रखी कि नियमित भर्ती के कारण फॉलन आउट हो रहे अतिथि विद्वानों के लिए सभी रिक्त पदों को पुनः खोला जाए ताकि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों का अनुभव व्यर्थ न जाए।

प्रतिनिधिमंडल का तर्क था कि वर्षों से महाविद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे अतिथि विद्वानों ने उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, इसलिए उनके भविष्य को लेकर स्थायी व्यवस्था जरूरी है।

अगले माह रविन्द्र भवन में होगा अतिथि विद्वान सम्मेलन

बैठक के दौरान उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि अगले माह भोपाल स्थित रविन्द्र भवन में अतिथि विद्वानों का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन में अतिथि विद्वान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अभिनंदन करेंगे तथा इस अवसर पर अतिथि विद्वानों से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं भी की जा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार केवल हरियाणा जैसी नीति तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि उससे भी बेहतर लाभ देने की दिशा में काम करने का प्रयास किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि अतिथि विद्वान लंबे समय से महाविद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण सेवाएं दे रहे हैं और उनका अध्यापन अनुभव बेकार नहीं जाने दिया जाएगा।

एसीएस अनुपम राजन से भी हुई चर्चा

भारतीय मजदूर संघ के महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर ने प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपम राजन से भी करवाई।

इस दौरान अनुपम राजन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री स्तर से प्रक्रिया पूरी होते ही प्रशासनिक स्तर पर किसी प्रकार की देरी नहीं की जाएगी।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 68 पीएम कॉलेज और नए महाविद्यालयों से जुड़े लगभग 2500 पदों के पृष्ठांकन का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है और इसे शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा।

इस जानकारी को अतिथि विद्वानों ने सकारात्मक संकेत माना है क्योंकि लंबे समय से रिक्त पदों और नई नियुक्तियों को लेकर मांग उठती रही है।

शिवराज सरकार के समय अधूरा रह गया था मुद्दा

अतिथि विद्वानों का मुद्दा प्रदेश में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में आयोजित अतिथि विद्वान पंचायत के दौरान भी कई अपेक्षाएं सामने आई थीं, लेकिन प्रतिनिधियों का मानना है कि उस समय उनकी मांगें पूरी तरह पूरी नहीं हो सकीं।

अब वर्तमान सरकार के रवैये को देखते हुए अतिथि विद्वानों में नई उम्मीद जगी है। संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि सरकार स्थायी नीति लागू करती है तो हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा (भारतीय मजदूर संघ संबद्ध) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया, मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया तथा वरिष्ठ अतिथि विद्वान डॉ. अजब सिंह राजपूत ने प्रदेशभर के अतिथि विद्वानों और उनके परिवारों की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से सकारात्मक संकेत मिलने से प्रदेश के अतिथि विद्वानों में विश्वास बढ़ा है और अब सभी को आगामी सम्मेलन तथा संभावित घोषणाओं का इंतजार है।

नीति और नियमितीकरण पर टिकी निगाहें

फिलहाल प्रदेश के हजारों अतिथि विद्वानों की निगाहें सरकार की आगामी घोषणाओं पर टिकी हुई हैं। यदि सम्मेलन में नई नीति, सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण या विशेष लाभों को लेकर कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो यह उच्च शिक्षा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

सरकार की ओर से मिले आश्वासनों के बाद अब अगले माह प्रस्तावित भोपाल सम्मेलन को अतिथि विद्वानों के भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है।