अपने ही देश में विदेशी जैसा महसूस कराया गया,यह घटना राष्ट्रीय कलंक,देहरादून में त्रिपुरा के छात्र की हत्या पर फूटा शशि थरूर का गुस्सा
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा कि त्रिपुरा के युवा को नस्लीय गालियां दी गईं, उसे चीनी और मोमो जैसे शब्दों से अमानवीय तरीके से अपमानित किया गया और अंत में उसकी हत्या कर दी गई.
शशि थरूर ने देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की नस्लीय घृणा के कारण हुई हत्या को 'राष्ट्रीय शर्म' बताया। उन्होंने कहा कि यह घटना समाज की विविधता का सम्मान करने में विफलता दर्शाती है। थरूर ने भारतीयों से अपने ही देश में किसी को विदेशी महसूस न कराने की अपील की। नागालैंड के मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने भी इसे अज्ञानता और पूर्वाग्रह का परिणाम बताया, जोर देकर कहा कि पूर्वोत्तर राज्य भारत का अभिन्न अंग हैं।
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार (26 दिसंबर, 2025) को त्रिपुरा के एक 24 साल के पोस्ट ग्रेजुएट छात्र एंजेल चकमा की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना को कथित तौर पर नस्लीय आधार पर हमला करार दिया है, जिसने तीखी राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है. इस बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने भी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने त्रिपुरा के छात्र की हत्या को राष्ट्रीय कलंक करार दिया है.
लोकसभा सांसद थरूर ने सोशल मीडिया पर लिखा, "उत्तराखंड में एंजेल चकवा की बेरहमी से हत्या सिर्फ एक दुखद घटना नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय शर्म की बात है। त्रिपुरा का एक युवा, एक गर्वित भारतीय, नस्लीय भेदभाव का शिकार हुआ, उसे "चीनी" और "मोमो" जैसे अपमानजनक शब्दों से अपमानित किया गया, और आखिरकार उसकी हत्या कर दी गई। यह हिंसा की कोई अकेली घटना नहीं है; यह अज्ञानता, पूर्वाग्रह और हमारे समाज की अपनी विविधता को पहचानने और उसका सम्मान करने में विफलता का नतीजा है।"
भारत में नस्लवाद बढ़ रहा
उन्होंने आगे लिखा, “यह चौंकाने वाला और बहुत शर्मनाक है कि उत्तर भारत में नस्लवाद बढ़ रहा है, जो अक्सर हल्के-फुल्के मज़ाक या सिस्टम की अनदेखी की आड़ में छिपा होता है। पूर्वोत्तर, अपनी समृद्ध संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं का केंद्र रहा है। यह भारतीय पहचान का हिस्सा है। फिर भी, इस क्षेत्र के लोगों को नियमित रूप से नस्लीय भेदभाव, बहिष्कार और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। यह खत्म होना चाहिए।”
प्रखर न्यूज़ व्यूज एक्सप्रेस