विधायक चिंतामणि मालवीय पर महिलाओं को प्रताड़ित करने के आरोप, महिला कांग्रेस ने राज्यपाल से की सख्त कार्रवाई की मांग

भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय पर महिलाओं को प्रताड़ित करने, चरित्र हनन और संपत्ति कब्जाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष रीना बोरासी ने राज्यपाल से मिलकर निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

विधायक चिंतामणि मालवीय पर महिलाओं को प्रताड़ित करने के आरोप, महिला कांग्रेस ने राज्यपाल से की सख्त कार्रवाई की मांग

महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष रीना बोरासी ने खोला मोर्चा, मालवीय पर गंभीर आरोप

MP में सियासी बवाल: भाजपा विधायक पर शोषण और कब्जे के आरोप, जांच की मांग तेज

महिलाओं की सुरक्षा पर घमासान, मालवीय पर कार्रवाई को लेकर राज्यपाल तक पहुंचा मामला

मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के आलोट विधायक चिंतामणि मालवीय पर महिलाओं को प्रताड़ित करने और उनके अधिकारों का हनन करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इन आरोपों को लेकर महिला कांग्रेस की प्रदेशाध्यक्ष रीना बोरासी ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है और राज्यपाल से मुलाकात कर तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की है।

राज्यपाल से मुलाकात, कार्रवाई की मांग तेज

गुरुवार को रीना बोरासी ने राज्यपाल से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें उन्होंने विधायक चिंतामणि मालवीय के खिलाफ कई गंभीर आरोपों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में महिलाओं के साथ हो रही कथित प्रताड़ना और शोषण की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है।

रीना बोरासी ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि विधायक के राजनीतिक रसूख के चलते पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं मिल रहा है और प्रशासन भी निष्क्रिय बना हुआ है। उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

प्रोफेसर ने लगाए मानसिक प्रताड़ना और चरित्र हनन के आरोप

इस पूरे विवाद का सबसे चर्चित पहलू विक्रम विश्वविद्यालय की एक पूर्व महिला प्रोफेसर का मामला है। रीना बोरासी के अनुसार, इस महिला प्रोफेसर ने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें मानसिक प्रताड़ना और चरित्र हनन शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि लगातार दबाव और अपमानजनक परिस्थितियों के चलते महिला प्रोफेसर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। यह मामला पिछले लगभग 10 वर्षों से लंबित है, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है। पीड़िता लगातार न्याय की गुहार लगा रही है, लेकिन कथित रूप से प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण उसकी आवाज दबाई जाती रही।

बुजुर्ग महिला की संपत्ति पर कब्जे का आरोप

मामला केवल मानसिक या सामाजिक प्रताड़ना तक सीमित नहीं है। रीना बोरासी ने एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला का मामला भी उठाया, जिसमें विधायक पर संपत्ति पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाया गया है।

आरोप के मुताबिक, विधायक ने 25-30 लोगों के साथ मिलकर बुजुर्ग महिला की दुकान के शटर तोड़ दिए और उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया। पीड़ित महिला पिछले पांच वर्षों से न्याय के लिए भटक रही है, लेकिन उसकी शिकायतों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

रीना बोरासी ने कहा कि यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि किस तरह सत्ता और प्रभाव का दुरुपयोग किया जा रहा है।

भाजपा सरकार पर भी साधा निशाना

महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि जब भी महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा से जुड़े मामले सामने आते हैं, तो कहीं न कहीं उनका संबंध भाजपा नेताओं से जुड़ा नजर आता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय आरोपियों को बचाने का काम कर रही है। उनका कहना था कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर है, तो उसे ऐसे मामलों में त्वरित और सख्त कदम उठाने चाहिए।

महिला आरक्षण लागू करने की भी उठाई मांग

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान रीना बोरासी ने एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया—महिला आरक्षण। उन्होंने मध्यप्रदेश की 230 विधानसभा सीटों में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को तत्काल लागू करने की मांग की।

उनका कहना है कि यदि महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना है, तो उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व देना जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि आगामी 2028 विधानसभा चुनाव से पहले ही इस व्यवस्था को लागू कर दिया जाए, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं राजनीति में सक्रिय भागीदारी कर सकें।

राज्यपाल का आश्वासन, अब प्रशासन की परीक्षा

राज्यपाल ने इन गंभीर आरोपों को गंभीरता से सुनते हुए उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, अब नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन और सरकार इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं।

यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो इससे न सिर्फ पीड़ित महिलाओं को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ेगी, बल्कि यह संदेश भी जाएगा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।

पहले से विवादों में रहे हैं मालवीय

गौरतलब है कि चिंतामणि मालवीय पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में बने हुए हैं। हाल ही में उन्होंने विधानसभा में सिंहस्थ लैंड पुलिंग योजना को लेकर अपनी ही सरकार को घेरा था और मुख्यमंत्री से तीखे सवाल पूछे थे।

इसके अलावा उन्होंने रतलाम कलेक्टर कार्यालय का घेराव भी किया था, जिससे प्रशासन के साथ उनका टकराव खुलकर सामने आया था। अब इन नए आरोपों ने उनके राजनीतिक करियर पर एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

राजनीतिक माहौल हुआ गरम

इन आरोपों के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही है, जबकि भाजपा की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला और आगे बढ़ता है, तो यह आगामी चुनावी समीकरणों पर भी असर डाल सकता है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान जैसे संवेदनशील मुद्दे हमेशा से राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

विधायक चिंतामणि मालवीय पर लगे ये आरोप केवल एक व्यक्ति विशेष तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल उठाते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है और पीड़ितों को न्याय मिल पाता है या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह राजनीतिक बहस तक ही सीमित रह जाता है।