न नेजे उठेंगे और न मेले लगेंगे

न नेजे उठेंगे और न मेले लगेंगे

राकेश अचल

तुम भले ही हिंदुस्तान की सरजमीं पर पैदा हुए हो लेकिन यहां न तुम्हारी कब्रें महफूज रहने वाली हैं न तुम्हारे नाम पर मेले लगाने की इजाजत दी जायेगे । और तो और नेजे भी नहीं उठने दिए जायेंगे। ये जिद है संविधान की शपथ लेकर काम करने वाली डबल इंजिन की सरकारों की। सरकारें अब संविधान के तहत नहीं बल्कि नागपुरिया संहिता के तहत चल रहीं हैं। कोई इन्हें रोकने वाला नहीं है। 

आपको याद है कि देश में 317 साल पहले सुपुर्दे खाक किया जा चुका अतीत का मुगलेआजम औरंगजेब हाल ही में ज़िंदा किया जा चुका है। औरंगजेब के नाम पर बिदकने वाले हमारे नेता और उनके अंध समर्थक [आप भक्त भी कह सकते हैं ] अब औरंगजेब की कब्र खोदने पर आमादा है। उन्हें औरंगजेब के नाम से ओसामा बिन लादेन की भनक मिलती है हालाँकि िनमने से किसी ने औरंगजेब को न पैदा होते देखा है और न अंतिम साँस लेते हुए । वे ओसामा बिन लादेन की हत्या की तरह एक बार फिर औरंगजेब की हत्या कर उसकी कब्र में दफन मिट्टी बाहर निकालकर समंदर के हवाले करना चाहते हैं। कोशिशें जारी हैं ,उन पर अमल होना बाकी है। अम्ल सिर्फ इसलिए नहीं हो रहा क्योंकि सरकार को डर है कि यदि औरंगजेब दूसरी बार भी मरने के बाद यदि नहीं मरा तो क्या होगा ?

मेरी औरंगजेब से कोई सहानुभूति नहीं है ,क्योंकि मैंने उसे देखा ही नहीं है और जिसे देखा ही नहीं है उससे मोहब्बत या नफरत करने का कोई मतलब नहीं है ,जो ऐसा कर रहे हैं वे या तो नादान हैं या बज्जर मूर्ख। क्योंकि कोई बज्जर मूर्ख ही सदियों पहले मर चुके किसी इंसान के खिलाफ नफरत का माहौल बना सकता है। मुश्किल ये है कि नफरत की ये आंधी रुक नहीं रही है । अब खबर है कि योगी आदित्यनाथ के यूपी में संभल में महमूद गजनवी के सेना के मुखिया सैयद सालार मसूद गाजी की याद में लगने वाला 'नेजा मेला' अब नहीं होगा। जिला . पुलिस-प्रशासन ने मेले के आयोजन की अनुमति नहीं दी है. प्रशासन का कहना है कि लुटेरे-हत्यारे के नाम पर किसी भी तरह का आयोजन नहीं होने दिया जाएगा. सालार मसूद गाजी को आक्रांता बताया जा रहा है।  

किस्सा ये है कि 1034 ईस्वी में बहराइच जिला मुख्यालय के समीप बहने वाली चित्तौरा झील के किनारे महराजा सुहेलदेव ने अपने 21 अन्य छोटे-छोटे राजाओं के साथ मिलकर सालार मसूद गाजी से युद्ध किया था और उसे युद्ध में पराजित कर मार डाला था. उसके शव को बहराइच में ही दफना दिया गया था, जहां सालाना जलसा होता है। मजे की बात ये है कि यूपी सरकार को इस इतिहास कि बारे में इसी साल इल्हाम हुआ जबकि वो यहां दूसरी बार सत्ता में है। चूंकि सरकार को ये इतिहास नागवार लगता है तो संभल के एडिशनल एसपी को ये कैसे पुसाता सो उंहोने ने तो कैमरे पर सालार समर्थकों को राष्ट्रविरोधी तक कह दिया। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति ने सोमनाथ जैसे मंदिरों पर हमला किया, कत्लेआम मचाया, कोई उसकी याद में मेले का आयोजन कैसे कर सकता है, ये अपराध है। नौकरशाही कि भगवाकरण का यही नतीजा पूरे देश में होने वाला है। मध्य्प्रदेश कि ग्वालियर शहर से इसका श्रीगणेश हो चुका है। ग्वालियर में कलेक्टर से लेकर निगमायुक्त तक भाजपा कि होली मिलन समारोह में भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह शामिल हो चुके हैं। 

बात यहीं नहीं खत्म नहीं हो रही। खबर है कि सनातन रंग में रंगा यूपी का जिला प्रशासन संभल 'नेजा मेले' मामले के बाद बहराइच में भी 'जेठ मेले' पर बैन लगाने जा रहा है। . इसके लिए विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी डीएम को ज्ञापन देंगे. ज्ञापन में बहराइच में सालार मसूद गाजी की दरगाह पर लगने वाले 'जेठ मेले' को परमिशन नहीं देने की मांग की जाएगी। इतिहास बताता है कि सैयद सालार मसूद गाजी का जन्म 1014 ईस्वी में अजमेर में हुआ था. वह विदेशी आक्रांता महमूद गजनवी का भांजा होने के साथ उसका सेनापति भी था. तलवार की धार पर अपनी विस्तारवादी सोच के साथ सालार मसूद गाजी 1030-31 के करीब अवध के इलाकों में सतरिख (बाराबंकी ) होते हुए बहराइच, श्रावस्ती पहुंचा था। अब इसतरवादी नीति तो आज की भाजपा की भी है। भाजपा पूरे देश में फ़ैल जाना चाहती है। तो क्या आने वाले कल में लोग भाजपा को भी अपराधी मानेंगे ? क्या भाजपा से भी इसी तरह नफरत की जाएगी जैसे की आज मजारों ,दरगाहों और कब्रों से की जा रहीहै । 

सैयद सालार मसूद गाजी की दरगाह पर साल में चार बार उर्स होता है, लेकिन सबसे बड़ा आयोजन जेठ महीने में होने वाला मेला है, जो पूरे एक महीने तक चलता है. इस मेले में लाखों की संख्या में हिंदू और मुस्लिम श्रद्धालु शामिल होते हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मेले में हिंदुओं की संख्या 50-60 प्रतिशत तक होती है, जो अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए यहां आते हैं। सालार की दरगाह पर मुंबई निवासी सुशीला जैसवाल पिछले 12-13 वर्षों से आ रही हैं। उन्होंने बताया कि जब उनके घर संतान नहीं हो रही थी, तब उन्होंने इस दरगाह पर मन्नत मांगी. उनके अनुसार, दरगाह पर उनकी प्रार्थना स्वीकार हुई और उन्हें बेटा हुआ. आज उनका बेटा 13 साल का हो चुका है। 

सवाल ये है कि क्या यूपी की और दूसरे सूबों में भाजपा की सरकार तमाम मुसलमानों की कब्रें खुदवा डालेगी ? क्या भाजपा हाई कमान ने अपनी तमाम सरकारों को फतवा जारी कर दिया है की मुस्लिम दरगाहों पर होने वाले तमाम उर्स और मेले लगाने की इजाजत किसी भी सूरत में नहीं दी जाये ? यदि ऐसा है तो फिर देश की सबसे बड़ी अदालत को स्वत् : संज्ञान लेकर मंदबुद्धि हो रही सरकारों को हिदायत देना चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो आप समझ लीजिये की भांग पूरे कुएं में घुल चुकी है। अब इतिहास को ,परम्पराओं को बचने वाला कोई नहीं है। अच्छे-खासे आबाद मुल्क इसी तरह की संकीर्णता से बर्बाद होते हैं। मुल्कों की साझा संस्कृति को समाप्त करने पर आमादा लोग शायद नहीं जानते की कोई रहे या न रहे लेकिन जिंदगी कि ये तमाम मेले कभी कम नहीं होते।