खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत का बड़ा बयान: 8.12 लाख किसानों से 44.16 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन, 7383 करोड़ रुपये का भुगतान जारी

खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश में अब तक 8.12 लाख किसानों से 44.16 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है। किसानों को 7383 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और 14.78 लाख किसानों ने स्लॉट बुक कराए हैं। उपार्जन अवधि 23 मई 2026 तक बढ़ा दी गई है। तौल पर्ची और भुगतान समय बढ़ाकर प्रक्रिया को और सुगम बनाया गया है।

खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत का बड़ा बयान: 8.12 लाख किसानों से 44.16 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन, 7383 करोड़ रुपये का भुगतान जारी

8.12 लाख किसानों से 44.16 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का रिकॉर्ड उपार्जन, 7383 करोड़ रुपये का भुगतान जारी: उपार्जन व्यवस्था को लेकर खाद्य मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत का बड़ा बयान

भोपाल। मध्यप्रदेश में रबी विपणन वर्ष के अंतर्गत गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया तेज गति से जारी है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने जानकारी दी है कि अब तक प्रदेश में 8 लाख 12 हजार किसानों से कुल 44 लाख 16 हजार मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया जा चुका है। उन्होंने इसे प्रदेश की कृषि व्यवस्था और सरकारी खरीद प्रणाली की मजबूत कार्यप्रणाली का परिणाम बताया।

मंत्री ने बताया कि किसानों की सुविधा और उपार्जन प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए सरकार लगातार व्यवस्थाओं में सुधार कर रही है। इसी क्रम में तौल पर्ची बनाने का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक कर दिया गया है, जबकि देयक (भुगतान आदेश) जारी करने का समय रात 12 बजे तक निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को देर तक केंद्रों पर इंतजार नहीं करना पड़ता और प्रक्रिया तेजी से पूरी हो रही है।

स्लॉट बुकिंग में बढ़ी भागीदारी, 14.78 लाख किसानों ने कराया पंजीयन

खाद्य मंत्री ने बताया कि उपार्जन व्यवस्था को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए स्लॉट बुकिंग प्रणाली लागू की गई है, जिसमें किसानों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब तक 14 लाख 78 हजार किसानों द्वारा गेहूँ उपार्जन के लिए स्लॉट बुक किए जा चुके हैं।

उन्होंने बताया कि किसानों की सुविधा को देखते हुए गेहूँ उपार्जन की अवधि को भी बढ़ा दिया गया है। पहले यह अवधि सीमित थी, लेकिन किसानों की मांग और अधिक उपज को ध्यान में रखते हुए इसे 9 मई से बढ़ाकर 23 मई 2026 तक कर दिया गया है। इससे अधिक से अधिक किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा।

उपार्जन केंद्रों पर बढ़ाई गई तौल क्षमता

सरकार ने उपार्जन केंद्रों पर भीड़ और समय की समस्या को देखते हुए महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। मंत्री राजपूत ने बताया कि प्रत्येक उपार्जन केंद्र पर तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6 कर दी गई है। इसके साथ ही जिलों को भी यह अधिकार दिया गया है कि आवश्यकता अनुसार तौल कांटों की संख्या में और वृद्धि कर सकें।

इसके अलावा एनआईसी सर्वर की क्षमता और संख्या में भी वृद्धि की गई है ताकि ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और डेटा प्रबंधन में किसी प्रकार की समस्या न आए। खाद्य विभाग द्वारा प्रति घंटे स्लॉट बुकिंग और उपार्जन की मॉनिटरिंग की जा रही है, जिससे किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या देरी को रोका जा सके।

किसानों को 7383 करोड़ रुपये का भुगतान

मंत्री ने बताया कि अब तक उपार्जित गेहूँ के बदले किसानों को 7383.01 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यह भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जा रहा है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य समय पर उपलब्ध कराना है, और इसी दिशा में यह भुगतान प्रक्रिया तेज गति से जारी है।

उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं का विस्तार

खाद्य मंत्री ने बताया कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों की सुविधा के लिए व्यापक व्यवस्थाएँ की गई हैं। इनमें पीने के पानी की व्यवस्था, छायादार स्थान, बैठने की सुविधा, जनसुविधाएँ आदि शामिल हैं।

इसके अलावा उपज की तौल समय पर और व्यवस्थित तरीके से हो सके, इसके लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसमें बारदाने, तौल कांटे, हम्माल और तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्शन, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण, पंखे, छन्ना और सफाई उपकरण शामिल हैं।

सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि उपार्जन केंद्रों की वास्तविक स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी पारदर्शी तरीके से सामने आए। इसके लिए सभी केंद्रों पर उपलब्ध सुविधाओं के फोटो भारत सरकार के स्व-मूल्यांकन पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं।

समर्थन मूल्य और बोनस सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल दर

राज्य सरकार किसानों को गेहूँ का उचित मूल्य प्रदान कर रही है। इस वर्ष किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य के साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया जा रहा है। इस प्रकार किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि यह नीति किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

भंडारण और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण के लिए सरकार ने पर्याप्त व्यवस्था की है। गेहूँ की भंडारण प्रक्रिया में जूट बारदानों के साथ-साथ पीपी/एचडीपी बैग का भी उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा एक बार उपयोग होने वाले जूट बारदानों की व्यवस्था भी की गई है, जिससे भंडारण सुरक्षित और दीर्घकालिक हो सके।

सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि उपार्जित अनाज को किसी भी प्रकार के नुकसान या खराबी से बचाया जा सके। इसके लिए गोदामों और भंडारण केंद्रों की सतत निगरानी की जा रही है।

किसानों के हित में सरकार का दावा

मंत्री गोविन्द सिंह राजपूत ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उपार्जन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर किसान अपनी उपज आसानी से बेच सके और उसे समय पर भुगतान प्राप्त हो।

उन्होंने यह भी कहा कि तकनीक के उपयोग से उपार्जन व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया गया है और आने वाले समय में इसे और बेहतर किया जाएगा।

मध्यप्रदेश में गेहूँ उपार्जन की यह प्रक्रिया न केवल बड़े पैमाने पर किसानों को लाभ पहुंचा रही है, बल्कि यह सरकारी व्यवस्था की दक्षता का भी उदाहरण बन रही है। 8 लाख से अधिक किसानों से 44 लाख मीट्रिक टन गेहूँ की खरीद और 7383 करोड़ रुपये का भुगतान इस बात का संकेत है कि राज्य में कृषि विपणन व्यवस्था मजबूत हो रही है।

उपार्जन अवधि बढ़ाने, स्लॉट बुकिंग व्यवस्था को सरल बनाने और केंद्रों पर सुविधाएँ बढ़ाने जैसे कदमों से किसानों को वास्तविक राहत मिली है। सरकार का दावा है कि आने वाले दिनों में यह प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सक्षम होगी, जिससे किसानों को अधिक लाभ मिलेगा।