GST के जटिल नियमों से ‘सरलीकरण’ का वादा हुआ ओझल; 9 करोड़ MSME और कपड़ा बाजार के छोटे व्यापारी गहरे असमंजस में – चम्पालाल बोथरा (CAIT)

15 दिसंबर से लागू GST पोर्टल के नए तकनीकी प्रावधानों ने MSME, खासकर टेक्सटाइल व गारमेंट सेक्टर के छोटे-मझोले व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

GST के जटिल नियमों से ‘सरलीकरण’ का वादा हुआ ओझल; 9 करोड़ MSME और कपड़ा बाजार के छोटे व्यापारी गहरे असमंजस में – चम्पालाल बोथरा (CAIT)

GST पोर्टल के नए तकनीकी नियमों से MSME और टेक्सटाइल व्यापार प्रभावित, e-invoice के बिना e-way bill पर लगी रोक से बढ़ी परेशानियां

सूरत,भारत सरकार द्वारा 15 दिसंबर से प्रभावी किए गए GST पोर्टल के नए तकनीकी प्रावधानों ने देशभर के MSME सेक्टर तथा टेक्सटाइल एवं गारमेंट बाजार के छोटे-मझोले व्यापारियों के बीच गंभीर चिंता उत्पन्न कर दी है।

नए सिस्टम इंटीग्रेशन के तहत अब ₹5 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए बिना e-invoice के e-way bill का निर्माण तकनीकी रूप से संभव नहीं रह गया है, जिससे व्यापार की दैनिक गतिविधियाँ बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

कानूनी स्थिति एवं तकनीकी बदलाव

GST कानून के अनुसार ₹50,000 से अधिक मूल्य के माल के परिवहन हेतु e-way bill अनिवार्य है।

अब तक व्यापारी e-way bill स्वतंत्र रूप से जनरेट कर पा रहे थे, किंतु NIC द्वारा e-invoice और e-way bill प्रणाली को आपस में लिंक कर दिए जाने के बाद यदि e-invoice का Reference Number (IRN) उपलब्ध नहीं है, तो पोर्टल e-way bill बनाने की अनुमति नहीं देता।

यह व्यवस्था विशेष रूप से कपड़ा एवं गारमेंट व्यापार के लिए अत्यंत कठिन है, जहाँ तेज़ गति से, बड़ी मात्रा में और रीयल-टाइम डिस्पैच होता है।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री चम्पालाल बोथरा ने कहा:

“वर्ष 2017 में GST लागू करते समय तत्कालीन वित्त मंत्री स्वर्गीय श्री अरुण जेटली जी ने यह भरोसा दिलाया था कि 2-3 साल बाद कपड़ा व्यापार में सरलीकरण लाया जाएगा।

आज स्थिति इसके विपरीत है। बार-बार नियमों और तकनीकी बदलावों से ₹10 से ₹15 करोड़ टर्नओवर वाले MSME व्यापारी सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।”

बोथरा ने बताया की 

“आज व्यापारी व्यापार बढ़ाने के बजाय दिन-भर GST पोर्टल पर डेटा सुधारने और नोटिस-जुर्माने से बचने में उलझा रहता है।

₹10–15 करोड़ टर्नओवर वाली इकाइयों के पास न तो IT विभाग है और न प्रशिक्षित स्टाफ।

सर्वर की मामूली खराबी भी ट्रकों को रोक देती है, जिससे माल, पूंजी और समय—तीनों फँस जाते हैं। यह सरलीकरण नहीं, बल्कि व्यापार पर थोपा गया तकनीकी बोझ है।”

*CAIT की प्रमुख मांगें*

CAIT की टेक्सटाइल एवं गारमेंट कमेटी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि:

 1. ₹10 करोड़ तक के MSME को राहत

₹10 करोड़ तक टर्नओवर वाले व्यापारियों को इस अनिवार्य लिंकिंग से कम से कम 1 वर्ष की अतिरिक्त छूट दी जाए।

 2. GST को वास्तव में सरल बनाया जाए

जेटली जी के विज़न के अनुरूप छोटे व्यापारियों को भयमुक्त किया जाए।

 3. पोर्टल फेल होने पर वैकल्पिक व्यवस्था

सर्वर डाउन की स्थिति में Manual / वैकल्पिक प्रक्रिया को मान्य किया जाए।

 4. दंडात्मक कार्रवाई पर अस्थायी रोक

आगामी 6 महीनों तक तकनीकी त्रुटियों या डेटा मिसमैच पर पेनल्टी/नोटिस न दिए जाएँ।

 बोथरा ने स्पष्ट किया कि देश में लगभग 9 करोड़ MSME एवं छोटे व्यापारी GST प्रणाली से जुड़े हैं।

यदि नियमों की जटिलता इसी तरह बढ़ती रही, तो MSME क्षेत्र की रीढ़ टूटने का खतरा पैदा हो जाएगा।

सरकार को चाहिए कि नीति बनाते समय जमीनी हकीकत और छोटे व्यापारी की सीमाओं को प्राथमिकता दे।