राहुल गांधी को झटका, सावरकर टिप्पणी मामले में हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से विपक्ष के नेता राहुल गांधी को झटका लगा है। लखनऊ की सेशन कोर्ट से 200 रुपए जुर्माना लगाने और समन के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए राहुल गांधी ने याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी ने राहुल गांधी की याचिका पर विचार करने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि उनके पास दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 397 के तहत सत्र न्यायाधीश के पास रिविजन याचिका दायर करने का विकल्प है। पूरा मामला विनायक दामोदर सावरकर को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी का है।
यह मामला 2022 का है। राहुल गांधी ने महाराष्ट्र में एक बयान दिया था। उन्होंने सावरकर को 'अंग्रेजों का नौकर' बताया था। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा था कि सावरकर 'अंग्रेजों से पेंशन लेते थे।' इसी मामले में लखनऊ की कोर्ट ने 5 मार्च, 2025 को राहुल गांधी पर 200 रुपये का जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना सुनवाई में शामिल न होने की वजह से लगाया गया था।
न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि खुद को तलब किए जाने के विरुद्ध सत्र अदालत के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दाखिल करने का विकल्प राहुल गांधी के पास है, लिहाजा इस न्यायालय के हस्तक्षेप की फिलहाल आवश्यकता नहीं है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने पारित किया। याचिका में राहुल गांधी की ओर से निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें सावरकर पर कथित अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में उन्हें तलब किया गया था। साथ ही राहुल गांधी ने इस मामले में अपने खिलाफ निचली अदालत में चल रही प्रक्रिया को भी चुनौती दी थी।
उनके अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल की दलील थी कि जो आरोप परिवाद में लगाए गए हैं, उनसे धारा 153ए व 505 आइपीसी का मामला नहीं बनता, बावजूद इसके निचली अदालत ने इन धाराओं में याची को तलब कर लिया है।
यह भी कहा गया कि निचली अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता के धारा 196 के प्रविधानों को नजरंदाज करते हुए राहुल गांधी को तलब किया है। हालांकि न्यायालय ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बगैर कहा कि याची के पास पुनरीक्षण याचिका दाखिले का विकल्प है।